शनिवार, 8 दिसंबर 2012

कुंभ को छू न सकेंगे शुंभ-निशुंभ

इलाहाबाद। पांच दशक पहले कुंभ मेले में हुई भगदड़ को याद कर संगम नगरी की यात्रा स्थगित करने का ख्याल मन में आ रहा हो तो उसे त्याग दें। महाकुंभ के दौरान पतित पावनी में डुबकी लगाने आने वालों को आपदा छू भी नहीं सके इसके पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। 

दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन को किसी भी आपदा से बचाने का जिम्मा नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) को सौंपा गया है। एनडीआरएफ की नौवीं बटालियन की दो कंपनियां 26 दिसंबर को गंगा की रेती पर आ जाएंगी और मेला खत्म होने तक यही रहेंगी। कुंभ में एनडीआरएफ की वही टुकड़ी तैनात की जा रही है जो हाल ही में जापान के फुकूशीमा में हुई परमाणु त्रासदी के बाद राहत व बचाव कार्य में शामिल होकर लौटी थी।

प्रयाग के कुंभ में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती के संगम पर एक माह तक चलने वाला मेला निरापद संपन्न हो इसके लिए मेला प्रशासन सभी संभव उपाय करने में जुटा है। इसके बावजूद प्राकृतिक या मानव निर्मित किसी गंभीर आकस्मिक स्थिति से निबटने के सारे उपाय भी किए जा रहे हैं। गंभीर आपदाओं से निबटने के लिए देश में नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स का गठन किया गया है। यह दस्ता भीषण बाढ़, भूकंप, परमाणु विस्फोट जैसी आपदाओं के दौरान राहत और बचाव का जिम्मा संभालता रहा है। 

जापान के फुकूशीमा में आठ नवंबर 2011 को हुई परमाणु त्रासदी के दौरान राहत और बचाव कार्य करने के लिए भी इसी दल के जवान भेजे गए थे। नौवीं बटालियन के यह 300 रेस्क्यूअर हाल ही में स्वदेश लौटे हैं। इन्हें अब प्रयाग पहुंचने का निर्देश दिया गया है। इस दल में एक कमांडेंट, एक असिस्टेंट कमांडेंट और एक डिप्टी कमांडेंट तैनात रहेंगे।

प्रधानमंत्री कार्यालय से संबद्ध एनडीआरएफ की नौवीं बटालियन का मुख्यालय पटना में है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स शहर में नवंबर के अंतिम सप्ताह तक आ जाएगी। फोर्स के ठहरने के लिए मेला क्षेत्र में अलग शिविर बनाया जाएगा। एनडीआरएफ में सेना और अर्ध सैनिक बलों के जांबाज जवानों का चयन कर उन्हें महीनों तक विशेष प्रशिक्षण देने के बाद शामिल किया जाता है। 

आचार्यबाड़ा संतों ने प्रशासन को दी चेतावनी-

आज मिलेगा प्रयागवाल का दल

जमीन एवं अन्य सुविधाओं को लेकर प्रयागवाल सभा का दल गुरुवार को मेलाधिकारी मणि प्रसाद मिश्र से मिलेगा। अध्यक्ष अजय पांडेय ने बताया कि अगर मेलाधिकारी हमारी समस्याओं का निस्तारण नहीं करेंगे तो हम मेले का बहिष्कार करेंगे।

मेलाधिकारी ने हर सुविधा देने का दिया आश्वासन-

प्रशासन की अनदेखी से आहत आचार्यबाड़ा के संतों ने सभा की। बुधवार की दोपहर सारे संत बड़ा खटला आश्रम दारागंज में इकट्ठा हुए। सबने मेला प्रशासन पर आचार्यबाड़ा की उपेक्षा का आरोप लगाया। साथ ही चेतावनी दी कि अगर मेला प्रशासन ने अपना रवैया न बदला तो संत आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे। फिर मेलाधिकारी ने संतों से मुलाकात कर उनकी हर मांग का समाधान करने का आश्र्वासन दिया। 

अध्यक्षता कर रहे स्वामी रामेश्‌र्र्वराचार्य ने कहा कि मेला प्रशासन का रवैया आचार्यबाड़ा के प्रति उपेक्षापूर्ण है। इससे संतों को आने वाले दिनों में दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हर बार की तरह हमें अबकी भी दो सौ एकड़ जमीन चाहिए। शिविर में प्रकाश, पानी व आवागमन की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। मेलाधिकारी मणि प्रसाद मिश्र ने संतों से मुलाकात कर हर संभव सुविधा देने का आश्र्वासन दिया। अब गुरुवार को संत पुन: मेलाधिकारी से मिलेंगे। इस दौरान स्वामी श्रीधराचार्य, स्वामी घनश्यामाचार्य, स्वामी परांकुशाचार्य, श्रीनिवासाचार्य, स्वामी धरणीधरानंद, स्वामी अनंताचार्य मौजूद थे।

जूना अखाड़ा का धर्मध्वजा पूजन आज-

श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा का धर्मध्वजा पूजन गुरुवार को होगा। सेक्टर चार में दोपहर 11.15 बजे काशी के पंडित वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ध्वजा का पूजन कराएंगे। इसमें अखाड़ा के सभापति श्रीमहंत गिरिजादत्त गिरि, सोहन गिरि, उमाशंकर भारती, श्री महंत भगवत पुरी सहित हजारों महंत मौजूद रहेंगे। ध्वजा पूजन के बाद कुंभ मेला क्षेत्र में अखाड़ों का शिविर लगना शुरू होगा। 


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