बुधवार, 5 दिसंबर 2012

महाकुंभ: 96 करोड़ से फैला तारों-खंभों का जाल

इलाहाबाद। कुंभ मेला क्षेत्र व आसपास संचार सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बीएसएनएल ने 40 बीटीएस लगा दिए हैं। इन बीटीएस को एक दिसंबर को कार्यरत कर दिया जाना था। यह अलग बात है कि बिजली का थ्री फेज कनेक्शन न मिलने के चलते अभी तक इन बीटीएस की टेस्टिंग और सिंक्त्रोनाइजेशन का कार्य नहीं हो सका है। मेला क्षेत्र में 96 करोड़ रुपये के खर्च से तारों का जाल फैला है। इसमें अभी सिर्फ सिंगल फेज बिजली आपूर्ति ही की जा रही है। इन सब के बीच बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी निर्धारित समय सीमा से पहले अपनी सारी तैयारियां पूरी करने का दावा कर रहे हैं।

गंगा-यमुना के तटवर्ती मैदान में नया शहर बसने जा रहा है। तंबुओं के इस शहर को रोशन रखने की जवाबदारी बिजली विभाग की है। इस शहर को जगमग करने के लिए विभाग ने 96 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। कार्य को पूरा करने के लिए बिजली विभाग को 31 दिसंबर तक का समय दिया गया है। किंतु, विभाग के अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने करीब 75 फीसदी काम पूरा कर लिया है। 25 फीसदी कार्य 15 दिसंबर तक पूरा करके कुंभ मेला क्षेत्र में आपूर्ति पूरी तरह कर दी जाएगी। अधिशासी अभियंता कुंभ मेला (प्रभारी) अनिल वर्मा ने बताया कि कुंभ मेला क्षेत्र में 400 केवीए क्षमता के 48 उपकेंद्र बनाए जाने हैं, जिसमें से करीब 35 का काम पूरा हो गया है। 11 हजार केवी की एचटी लाइन 70 किलोमीटर बिछाई जानी है। इसमें 60 हजार किमी का काम पूरा हो गया है। सात सौ किलोमीटर बिछने वाली एलटी लाइन में चार सौ किलोमीटर का काम हो चुका है। 20 हजार स्ट्रीट लाइट में करीब 15 हजार लग चुकी हैं। दस हाईमास्ट लग चुका है। अरैल व सोमेश्‌र्र्वर महादेव से लेकर नए यमुना पुल तक प्रकाश की व्यवस्था पूरी कर ली गई है। 

बांध के नीचे गंगा के पश्चिम दारागंज की ओर से संगम क्षेत्र में लाइटें लग चुकी हैं। अक्षयवट मार्ग से लेकर बदरा सोनौटी, भारद्वाज मार्ग तक मुख्य सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें लग चुकी हैं। कुंभ मेला के अधीक्षण अभियंता एके मित्तल का कहना है कि 15 दिसंबर तक कार्य पूरा करके कुंभ मेला क्षेत्र में आपूर्ति चालू कर दी जाएगी। जो भी थोड़ी बहुत कमी होगी, उसे भी दूर किया जाएगा।

48 जनरेटर निर्बाध रखेंगे आपूर्ति-

मेले में बिजली चली जाने के बाद भी अंधेरा नहीं होगा। अधिशासी अभियंता कुंभ मेला (प्रभारी) अनिल वर्मा का कहना है कि आकस्मिक स्थिति में भी विद्युत आपूर्ति जारी रखने के लिए 48 जनरेटर की व्यवस्था की गई है। इसमें 63 केवीए के 30, 125 केवीए के 17 व 160 केवीए का एक जनरेटर लगेगा।

फ्री मिलेगी कल्पवासियों को बिजली-

कल्पवासियों को बिजली मुफ्त में मिलती है, लेकिन सिक्योरिटी के नाम पर बल्ब या सीएफएल के लिए 115 रुपये जमा कराए जाते हैं। मेला समाप्त होने के बाद ये रुपये कल्पवासी को वापस कर दिए जाते हैं। बिजली विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मेला क्षेत्र में बने पावर हाउस में लगे मीटर के मुताबिक प्रशासन से भुगतान लेते हैं। कल्पवास, अखाड़े व दुकान लगाने वालों से कोई रुपये नहीं लिए जाते। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सप्ताह भर के भीतर किस अखाड़े में कितनी आपूर्ति देनी है, किस कल्पवास में कितने बल्ब व सीएफएल लगेंगे और कितनी दुकानों में बिजली के कनेक्शन दिए जाएंगे, इसकी सूची दी जाएगी। इसमें दुकानदारों को दिए जाने वाले कनेक्शन का रेट भी रहेगा।


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