इलाहाबाद। आस्था शिक्षा की मोहताज नहीं हो, रेलवे इस बात का ध्यान
रखेगा। इसीलिए कुंभ मेले के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को सुलभ यात्रा
मुहैया कराने के लिए रंगों की मदद ली जाएगी। रूट निर्धारण के लिए प्रयोग
किए जाने वाले रंग रेलवे टिकट घरों के साथ विश्रामालयों पर भी दिखेंगे।
नैनी में पचास हजार यात्रियों की क्षमता वाले ऐसे यात्री बाड़े का निर्माण
अंतिम चरण में है। मेले के दौरान मध्य व दक्षिण भारत से आने वाले
श्रद्धालुओं की संख्या सबसे अधिक होती है। ऐसे श्रद्धालुओं में अधिकांश कम
पढ़े-लिखे होते हैं। जिन्हें स्टेशन पर लगाए जाने वाले डिस्प्ले बोर्ड
पढ़ने में दिक्कत पेश आती है। ऐसे में या तो वे गलत रूट की ट्रेनों में
सवार हो जाते हैं या ट्रेन छूट जाती है। रेलवे ने यात्रियों की इस समस्या
को ध्यान में रखते हुए इस बार लाल, हरे और पीले रंग की मदद से टिकट घर और
विश्रामालयों को रूट के अनुसार अलग करने का निर्णय लिया है। इसकी सूचना भी
लगातार कंट्रोल रूम से प्रसारित की जाती रहेगी जिससे यात्री सही टिकट घर पर
पहुंचें और अपने रूट की ट्रेन में ही सवार हों। ऐसा होने से एक ओर जहां
यात्रियों को भटकना नहीं पड़ेगा वहीं स्टेशन पर भीड़ के नियंत्रण में भी
मदद मिलेगी। नैनी स्टेशन पर यात्रियों के लिए ऐसे ही तीन बाड़ों का निर्माण
किया जा रहा है। जिनमें दो की क्षमता लगभग दस-दस हजार और तीसरे की तीस
हजार होगी। बाड़े के अंदर टिकट घर, कैंटीन, शौचालय, विश्रामालय की सुविधा
होगी। स्टेशन अधीक्षक दुर्गा प्रसाद ने बताया कि पंद्रह दिसंबर तक यात्री
सुविधाओं से जुड़े अधिकांश काम पूरे कर लिए जाएंगे।
स्वामी अधोक्षजानंद का कश्मीर व पूर्वोत्तर के कई अलगाववादी नेताओं को आमंत्रण पहल-
देश के विभिन्न प्रांतों में सरकार के लिए सिरदर्द बने अलगाववादियों के
नेता भी इस महाकुंभ में अपनी समस्याओं का हल तलाशते दिखाई दे सकते हैं।
उन्हें सही राह दिखाने के लिए एक मंच पर लाने की मुहिम जगद्गुरु शंकराचार्य
स्वामी अधोक्षजानंद ने संभाली है। उन्होंने 5 जनवरी से 15 जनवरी तक देश के
विभिन्न प्रांतों के विद्वानों को इन समस्याओं पर विचार के लिए आमंत्रित
किया है। इसमें कई अलगाववादी नेताओं के भी शामिल होने की संभावना है।
उड़ीसा के पूर्व मुख्यमंत्री गिरधर गोमांग भी इसमें शामिल होंगे।
इससे पहले के महाकुंभ में भी स्वामी अधोक्षजानंद के महाकुंभ स्थित
आश्रम में असम व जम्मू कश्मीर के कई नेताओं का जमावड़ा हो चुका है। कुछ माह
पहले उन्होंने अमरनाथ यात्रा के दौरान भी जम्मू-कश्मीर के कई नेताओं से
मुलाकात की थी जिसमें जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक, आल
इंडिया हुर्रियत कांग्रेस के नरमपंथी गुट के मीरवाइज उमर फारूक व
कट्टरपंथी ग्रुप के अली शाह गिलानी प्रमुख थे। रविवार को यहां महाकुंभ
क्षेत्र में पहुंचे स्वामी अधोक्षजानंद ने बताया कि हमने उन्हें महाकुंभ
में आने के लिए आमंत्रित किया है। मेरा मानना है कि कश्मीर की समस्या
राजनीतिक है। इसे मजहबी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। स्वामी अधोक्षजानंद
ने कहा कि इसके साथ ही अल्फा के नेताओं राजीव बरुआ और शसधर चौधरी को भी
उन्होंने महाकुंभ क्षेत्र में आने का निमंत्रण दिया है। यहां अलगाववादियों
के मुद्दों ओर मुख्य धारा में उनकी वापसी के लिए उपायों पर मंथन किया
जाएगा। उन्होंने कहा कि आंतरिक समस्याएं देश के विकास में बाधा बन रही हैं
और इन्हें आपसी बातचीत के जरिए ही खत्म किया जा सकता है। वर्तमान में यह
इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि क्योंकि चीन आदि पड़ोसी देश भारत के लिए खतरा
बनते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उड़ीसा के पूर्व मुख्यमंत्री गिरधर
गोमांग ने महाकुंभ में अपनी संस्था के जरिए सांस्कृतिक कार्यकमों की
स्वीकृति दे दी है।