रविवार, 16 दिसंबर 2012

पौष मास में जगाएं आध्यात्मिक ऊर्जा

पौष मास को लेकर लोगों में अनेक भ्रांतियां हैं। इस मास में मांगलिक कार्यो का विधान न होने से लोग मान लेते हैं कि यह अत्यंत निकृष्ट मास है। लोग मानते हैं कि यह शुभ कामों में नेष्ट (खराब) फल देता है, जबकि ऐसा नहीं है। ऋषि-मुनियों ने पौष मास को सांसारिक कार्यो के लिए निषिद्ध सिर्फ इसलिए किया था, ताकि लोग इस मास में इन कार्यो से अवकाश लेकर आध्यात्मिक तरीके से आत्मोन्नति कर सकें और अपनी ऊर्जा को सक्रिय कर सकें।

पौष मास में अधिकांशत: सूर्य धनु राशि में रहता है। ज्योतिष शास्त्र में धनु राशि का स्वामी बृहस्पति को माना गया है। मान्यता है कि देवताओं के गुरुदेव बृहस्पति उनके परामर्शदाता होने के साथ-साथ मनुष्यों को भी धर्म-सत्कर्म का ज्ञान देते हैं। ऋषियों ने सौर धनु मास को खर मास का नाम इसलिए दिया ताकि लोग इसमें सांसारिक कामों शादी, गृह प्रवेश आदि से मुक्त रहकर इस मास का उपयोग अपने आध्यात्मिक लाभ के लिए कर सके। अपने लिए तो इंसान सब कुछ करता है, लेकिन परहित के लिए भी वह काम करे। आत्मोन्नति के लिए सत्संग, तीर्थाटन, स्वाध्याय, ग्रंथों का अध्ययन और जरूरतमंदों की सेवा कर सके। देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु में आत्मा कारक सूर्य की स्थिति जप-तप, पूजा-पाठ, ध्यान-योगाभ्यास के लिए प्रेरणादायक होती है। हम इस अवधि में आध्यात्मिक साधना करके चंचल मन पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार, इस कालखंड में प्राकृतिक ऊर्जा इंद्रिय-निग्रह में सहायक होती है। चित्त सांसारिक वैराग्य की ओर सहज ही उन्मुख हो उठता है। वैराग्य के लिए स्वांग रचने की आवश्यकता नहीं। वैरागी बनने का ढोंग करना ही मिथ्याचार है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण एक श्लोक में कहते हैं कि जो पुरुष कर्र्मेद्रियों को हठ से रोककर इंद्रियों के भोगों का मन से चिंतन करता रहता है, वह मिथ्याचारी है। वस्तुत: वैराग्य का तात्पर्य संसार को छोड़कर सिर मुड़ाना या जोगिया कपड़े पहनना नहीं है, बल्कि वैराग्य का वास्तविक अभिप्राय संसार में रहकर गृहस्थ जीवन के कर्तव्य का पालन करते हुए दुष्कर्र्मो और पाखंड से विरक्ति है। वैराग्य संयम की शक्ति से पोषित होता है, लेकिन आज समाज में आत्म संयम का अभाव दिख रहा है। मन पर विवेक का अंकुश होने पर ही व्यक्ति संयमी हो सकता है। धनु मास में हम आध्यात्मिक ऊर्जा को अपने में उतार सकते हैं।

रोज की दौड़-भाग भरी जिंदगी में हमारी ऊर्जा का क्षरण होता रहता है। यह जानते हुए भी हम सांसारिक भोगों के आकर्षण से बच नहीं पाते। पौष मास हमें संयमी बनाकर आध्यात्मिक ऊर्जा के संचय का सुअवसर प्रदान करता है। ऐसे उपयोगी कालखंड को खर मास कहकर इसकी उपेक्षा करना उचित नहीं है। सूर्य के तेज और देवगुरु की दिव्यता से संपन्न पौष मास आध्यात्मिक रूप से समृद्धि दायक है।


शनिवार, 8 दिसंबर 2012

सात फरवरी को संत सम्मेलन में बनेगी रणनीति


इलाहाबाद। संगम तट पर त्याग और तपस्या का मेला कुंभ जल्द ही पूरे शबाब पर होगा। तीर्थराज प्रयाग की पावन भूमि पर लगने वाले इस मेले में मोक्ष की आस में जहां लाखों लोग संगम की रेती पर जप-तप करेंगे। वहीं धार्मिक नगरी में विश्व हिंदू परिषद के आला रणनीतिकारों का जमघट लगेगा, जो अयोध्या में श्रीराम की जन्मस्थली पर मंदिर निर्माण की रणनीति तैयार करेंगे। उसी के अनुरूप देशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा। विहिप यह काम खुद के बजाय संतों के नेतृत्व में करेगा ताकि आम जनमानस पर उसका प्रभाव पड़े। विहिप ने इसके लिए कुंभ में छह और सात फरवरी को संत सम्मेलन का आयोजन किया है जिसमें करीब 20 हजार संत-महात्मा शामिल होंगे। 

लोकसभा चुनाव से पहले हो रहे इस कुंभ मेले पर सबकी नजर है। खासकर विहिप के रणनीतिकार इसे काफी गंभीरता से ले रहे हैं क्योंकि यह एकमात्र ऐसा स्थल है जहां लाखों लोगों तक वह अपनी बात को आसानी से पहुंचाने के साथ सीधा संपर्क स्थापित कर सकते हैं। वर्ष 2013 में अयोध्या में विवादित ढांचा गिरने के 21 साल पूरे होंगे जिसे देखते हुए विहिप इस मामले में ठोस फैसला लेकर व्यापक आंदोलन शुरू करेगा, जिससे हिंदू जनमानस एकजुट होकर उनके पाले में आए। इस सिलसिले में विहिप की संत उच्चाधिकार समिति के अध्यक्ष गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ और संयोजक स्वामी परमानंद सक्रिय हैं। विहिप के प्रदेश प्रवक्ता शरद शर्मा के अनुसार विहिप का हर कार्य संतों के आशीर्वाद से हुआ है, आगे भी हम उसी के अनुरूप काम करेंगे। 


महाकुंभ: अखाड़े का नगर प्रवेश

इलाहाबाद। चांदी के हौदे में सवार संतों का कारवां सड़क पर निकला तो हर किसी की आंखें उनके ऊपर टिक गई। कोई जयकारा लगाता कोई उनके स्वागत में हाथ जोड़कर खड़ा हो जाता। श्रद्धा से ओतप्रोत अनेक लोगों ने संतों के ऊपर पुष्पवर्षा करके प्रयाग में उनका भव्य स्वागत किया। यह नजारा मंगलवार को देखने को मिला। कुंभ मेला के लिए आहृवान अखाड़ा का नगर प्रवेश हुआ। वाराणसी से आए अखाड़े के महंत शाही अंदाज में शहर पहुंचे। बैंडबाजा, ध्वज-पताका, हाथी, घोड़ा के साथ सैकड़ों संतों का कारवां सड़क पर निकला तो लोगों की उत्सुकता बढ़ गई। संतों को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर भीड़ जुटी। जुलूस का नेतृत्व रमता पंच के श्रीमहंत श्रीमहंत नीलकंठ गिरि, श्रीमहंत कैलाशपुरी व श्रीमहंत सत्यगिरि ने किया। अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महंत हरि गिरि, जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय मंत्री श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती, श्रीमहंत पृथ्वी गिरि, उमाशंकर भारती, हरिहरानंद, हरदेव गिरि सहित कई अखाड़ों के संत-महात्मा शामिल थे। संतों का जुलूस झूंसी, अलोपीबाग, बैरहना, कीडगंज से होता हुआ जुलूस यमुना बैंक रोड स्थित मौज गिरि मंदिर जाकर समाप्त हुआ। अब यहीं से अखाड़ा का कुंभ क्षेत्र में प्रवेश होगा। 

अस्त्र-शस्त्र लाए साथ-

जूना अखाड़ा कुंभ को लेकर अपनी पूरी तैयारी के साथ आया है, इसमें पूजन के लिए चौकी व अन्य सामग्री, के अलावा अस्त्र, शस्त्र भी साथ लाए हैं, इसमें भाला, गहदाला, गदा के साथ कुछ संत पिस्टल भी लेकर आए हैं। 

घर ले गए मिट्टी-

अखाड़ा के संतों का जुलूस गुजरने के बाद सड़क के किनारे खड़े लोगों ने वहां की मिट्टी को माथे पर लगाया। जबकि कुछ उसे श्रद्धाभाव से अपने साथ घर ले गए।

कुंभ मेले पर सेना भी रखेगी नजर-

प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अंबरीश चंद्र शर्मा ने माना कि कुंभ में आतंकी खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि किसी भी आतंकी साजिश से निपटने के लिए यूपी पुलिस पूरी तरह से सक्षम है। श्री शर्मा मंडलीय समीक्षा बैठक के बाद पुलिस लाइन स्थित सभागार में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि कुंभ में आतंकी साजिश से निपटने के लिए एटीएस और एसटीएफ की टीमें लगा दी गई हैं। एंटी माइंस टीम की भी व्यवस्था की गई है। जल पुलिस के साथ कई पेट्रोलिंग टीमें भी कुंभ में तैनात कर दी गई हैं। केंद्र से स्पेशल फोर्स की भी मदद ली जा रही है। प्रमुख स्नान पर्वो पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल मौजूद रहेगा। भीड़ कितनी ही क्यों न हो, एक-एक व्यक्ति की चेकिंग होगी। एक सवाल के जवाब में बताया कि मेला क्षेत्र में ही 127 कैमरों की व्यवस्था की गई है, जिससे हर व्यक्ति पर नजर रखी जा सकेगी। किसी भी अफवाह के बाद की स्थिति से निपटने के लिए हम स्पेशल फोर्स की मदद लेंगे। साथ ही एसएमएस की व्यवस्था भी की गई है, जिससे हर व्यक्ति को संदेश के माध्यम से सही स्थिति से अवगत कराया जा सके। हम सेना से भी मदद ले रहे हैं। वहीं इससे पहले प्रमुख सचिव (गृह) आर.एम. श्रीवास्तव ने बताया कि कुंभ मेले में किसी तरह का व्यवधान नहीं होगा। इलाहाबाद मंडल की कानून व्यवस्था पर संतोष जताया। यदि कहीं भी सांप्रदायिक हिंसा हुई, तो उस क्षेत्र के अपर पुलिस अधीक्षक और क्षेत्राधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
पांच अखाड़ों की पेशवाई की तिथियां निर्धारित-अखाड़ों ने अपनी-अपनी पेशवाई की तिथियां निर्धारित कर दी हैं और इसकी जानकारी मेला प्रशासन को भी उपलब्ध करा दी है। अब उनकी पेशवाई को ठीक ढंग से संपन्न कराने में प्रशासन अपनी तैयारी में जुट गया है। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी की पेशवाई तीन जनवरी की सुबह 6 बजकर 45 मिनट पर होगी। वहीं श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा की पेशवाई 19 दिसंबर को होगी। श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े की पेशवाई 18 दिसंबर को होगी। श्री पंच अटल अखाड़ा की पेशवाई पांच जनवरी को होगी। श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा बड़ा उदासीन की पेशवाई 10 जनवरी को होगी। 

पीपे का पुल बढ़ाने की मांग-कुंभ मेला क्षेत्र के एक भाग में पीपे का पुल बढ़ाने की मांग शुरू हो गई है। इस बार प्रशासन कुंभ मेला संगम तट से सलोरी तक बसा रहा है। इसके लिए संगम से पुरानी जीटी रोड तक पीपे के दस पांटून पुल बनाए जा रहे हैं। जबकि जीटी रोड से सलोरी तक आवागमन के लिए चार पुल बनाए जाएंगे। प्रयाग धर्मसंघ के अध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल ने इसकी संख्या बढ़ाने की मांग की है। मंडलायुक्त देवेश चतुर्वेदी को ज्ञापन देकर कहा कि मेला की 80 प्रतिशत आबादी वाले क्षेत्र में सिर्फ चार पुल होने से भीड़ नियंत्रण करने में दिक्कत होगी, साथ ही श्रद्धालुओं को काफी भटकना पड़ेगा। प्रमुख स्नान पर्वो पर स्थिति और खराब हो जाएगी। 

ठेकेदार करेंगे टेंडर कार्य का बहिष्कार-कुंभ मेले के मद्देनजर नगर क्षेत्र में 456 कार्यो के लिए सात दिसंबर को डाले जाने वाले टेंडर का ठेकेदार बहिष्कार करेंगे। उनका कहना है कि उनके पुराने कार्यो का अब तक भुगतान नहीं मिला है। इसलिए जब तक वह भुगतान नहीं हो जाता तब तक नया टेंडर नहीं होने देंगे। सूत्रों के अनुसार नगर निगम प्रशासन एवं ठेकेदारों के बीच आगामी दिनों में वार्ता हो सकती है। जिससे यह मामला सुलझ जाएगा और टेंडर में कोई दिक्कत नहीं होगी।

शिविर अध्यक्षों की बैठक आज-कुंभ मेला को लेकर श्रीरामानुज नगर प्रबंध समति आचार्यबाड़ा की बैठक बुधवार को बाड़ा खटला आश्रम दारागंज में होगा। स्वामी रामेश्‌र्र्वराचार्य की अध्यक्षता में दोपहर दो बजे आयोजित इस बैठक में मेला प्रशासन द्वारा कुंभ को लेकर किए जा रहे कार्यो पर विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक में आचार्यबाड़ा अपनी आगे की रणनीति भी घोषित करेगा।


कुंभ को छू न सकेंगे शुंभ-निशुंभ

इलाहाबाद। पांच दशक पहले कुंभ मेले में हुई भगदड़ को याद कर संगम नगरी की यात्रा स्थगित करने का ख्याल मन में आ रहा हो तो उसे त्याग दें। महाकुंभ के दौरान पतित पावनी में डुबकी लगाने आने वालों को आपदा छू भी नहीं सके इसके पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। 

दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन को किसी भी आपदा से बचाने का जिम्मा नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) को सौंपा गया है। एनडीआरएफ की नौवीं बटालियन की दो कंपनियां 26 दिसंबर को गंगा की रेती पर आ जाएंगी और मेला खत्म होने तक यही रहेंगी। कुंभ में एनडीआरएफ की वही टुकड़ी तैनात की जा रही है जो हाल ही में जापान के फुकूशीमा में हुई परमाणु त्रासदी के बाद राहत व बचाव कार्य में शामिल होकर लौटी थी।

प्रयाग के कुंभ में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती के संगम पर एक माह तक चलने वाला मेला निरापद संपन्न हो इसके लिए मेला प्रशासन सभी संभव उपाय करने में जुटा है। इसके बावजूद प्राकृतिक या मानव निर्मित किसी गंभीर आकस्मिक स्थिति से निबटने के सारे उपाय भी किए जा रहे हैं। गंभीर आपदाओं से निबटने के लिए देश में नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स का गठन किया गया है। यह दस्ता भीषण बाढ़, भूकंप, परमाणु विस्फोट जैसी आपदाओं के दौरान राहत और बचाव का जिम्मा संभालता रहा है। 

जापान के फुकूशीमा में आठ नवंबर 2011 को हुई परमाणु त्रासदी के दौरान राहत और बचाव कार्य करने के लिए भी इसी दल के जवान भेजे गए थे। नौवीं बटालियन के यह 300 रेस्क्यूअर हाल ही में स्वदेश लौटे हैं। इन्हें अब प्रयाग पहुंचने का निर्देश दिया गया है। इस दल में एक कमांडेंट, एक असिस्टेंट कमांडेंट और एक डिप्टी कमांडेंट तैनात रहेंगे।

प्रधानमंत्री कार्यालय से संबद्ध एनडीआरएफ की नौवीं बटालियन का मुख्यालय पटना में है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स शहर में नवंबर के अंतिम सप्ताह तक आ जाएगी। फोर्स के ठहरने के लिए मेला क्षेत्र में अलग शिविर बनाया जाएगा। एनडीआरएफ में सेना और अर्ध सैनिक बलों के जांबाज जवानों का चयन कर उन्हें महीनों तक विशेष प्रशिक्षण देने के बाद शामिल किया जाता है। 

आचार्यबाड़ा संतों ने प्रशासन को दी चेतावनी-

आज मिलेगा प्रयागवाल का दल

जमीन एवं अन्य सुविधाओं को लेकर प्रयागवाल सभा का दल गुरुवार को मेलाधिकारी मणि प्रसाद मिश्र से मिलेगा। अध्यक्ष अजय पांडेय ने बताया कि अगर मेलाधिकारी हमारी समस्याओं का निस्तारण नहीं करेंगे तो हम मेले का बहिष्कार करेंगे।

मेलाधिकारी ने हर सुविधा देने का दिया आश्वासन-

प्रशासन की अनदेखी से आहत आचार्यबाड़ा के संतों ने सभा की। बुधवार की दोपहर सारे संत बड़ा खटला आश्रम दारागंज में इकट्ठा हुए। सबने मेला प्रशासन पर आचार्यबाड़ा की उपेक्षा का आरोप लगाया। साथ ही चेतावनी दी कि अगर मेला प्रशासन ने अपना रवैया न बदला तो संत आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे। फिर मेलाधिकारी ने संतों से मुलाकात कर उनकी हर मांग का समाधान करने का आश्र्वासन दिया। 

अध्यक्षता कर रहे स्वामी रामेश्‌र्र्वराचार्य ने कहा कि मेला प्रशासन का रवैया आचार्यबाड़ा के प्रति उपेक्षापूर्ण है। इससे संतों को आने वाले दिनों में दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हर बार की तरह हमें अबकी भी दो सौ एकड़ जमीन चाहिए। शिविर में प्रकाश, पानी व आवागमन की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। मेलाधिकारी मणि प्रसाद मिश्र ने संतों से मुलाकात कर हर संभव सुविधा देने का आश्र्वासन दिया। अब गुरुवार को संत पुन: मेलाधिकारी से मिलेंगे। इस दौरान स्वामी श्रीधराचार्य, स्वामी घनश्यामाचार्य, स्वामी परांकुशाचार्य, श्रीनिवासाचार्य, स्वामी धरणीधरानंद, स्वामी अनंताचार्य मौजूद थे।

जूना अखाड़ा का धर्मध्वजा पूजन आज-

श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा का धर्मध्वजा पूजन गुरुवार को होगा। सेक्टर चार में दोपहर 11.15 बजे काशी के पंडित वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ध्वजा का पूजन कराएंगे। इसमें अखाड़ा के सभापति श्रीमहंत गिरिजादत्त गिरि, सोहन गिरि, उमाशंकर भारती, श्री महंत भगवत पुरी सहित हजारों महंत मौजूद रहेंगे। ध्वजा पूजन के बाद कुंभ मेला क्षेत्र में अखाड़ों का शिविर लगना शुरू होगा। 


बुधवार, 5 दिसंबर 2012

अलगाववादियों को सही राह दिखाएगा कुंभ

इलाहाबाद। आस्था शिक्षा की मोहताज नहीं हो, रेलवे इस बात का ध्यान रखेगा। इसीलिए कुंभ मेले के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को सुलभ यात्रा मुहैया कराने के लिए रंगों की मदद ली जाएगी। रूट निर्धारण के लिए प्रयोग किए जाने वाले रंग रेलवे टिकट घरों के साथ विश्रामालयों पर भी दिखेंगे। नैनी में पचास हजार यात्रियों की क्षमता वाले ऐसे यात्री बाड़े का निर्माण अंतिम चरण में है। मेले के दौरान मध्य व दक्षिण भारत से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सबसे अधिक होती है। ऐसे श्रद्धालुओं में अधिकांश कम पढ़े-लिखे होते हैं। जिन्हें स्टेशन पर लगाए जाने वाले डिस्प्ले बोर्ड पढ़ने में दिक्कत पेश आती है। ऐसे में या तो वे गलत रूट की ट्रेनों में सवार हो जाते हैं या ट्रेन छूट जाती है। रेलवे ने यात्रियों की इस समस्या को ध्यान में रखते हुए इस बार लाल, हरे और पीले रंग की मदद से टिकट घर और विश्रामालयों को रूट के अनुसार अलग करने का निर्णय लिया है। इसकी सूचना भी लगातार कंट्रोल रूम से प्रसारित की जाती रहेगी जिससे यात्री सही टिकट घर पर पहुंचें और अपने रूट की ट्रेन में ही सवार हों। ऐसा होने से एक ओर जहां यात्रियों को भटकना नहीं पड़ेगा वहीं स्टेशन पर भीड़ के नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। नैनी स्टेशन पर यात्रियों के लिए ऐसे ही तीन बाड़ों का निर्माण किया जा रहा है। जिनमें दो की क्षमता लगभग दस-दस हजार और तीसरे की तीस हजार होगी। बाड़े के अंदर टिकट घर, कैंटीन, शौचालय, विश्रामालय की सुविधा होगी। स्टेशन अधीक्षक दुर्गा प्रसाद ने बताया कि पंद्रह दिसंबर तक यात्री सुविधाओं से जुड़े अधिकांश काम पूरे कर लिए जाएंगे।

स्वामी अधोक्षजानंद का कश्मीर व पूर्वोत्तर के कई अलगाववादी नेताओं को आमंत्रण पहल-

देश के विभिन्न प्रांतों में सरकार के लिए सिरदर्द बने अलगाववादियों के नेता भी इस महाकुंभ में अपनी समस्याओं का हल तलाशते दिखाई दे सकते हैं। उन्हें सही राह दिखाने के लिए एक मंच पर लाने की मुहिम जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद ने संभाली है। उन्होंने 5 जनवरी से 15 जनवरी तक देश के विभिन्न प्रांतों के विद्वानों को इन समस्याओं पर विचार के लिए आमंत्रित किया है। इसमें कई अलगाववादी नेताओं के भी शामिल होने की संभावना है। उड़ीसा के पूर्व मुख्यमंत्री गिरधर गोमांग भी इसमें शामिल होंगे। 

इससे पहले के महाकुंभ में भी स्वामी अधोक्षजानंद के महाकुंभ स्थित आश्रम में असम व जम्मू कश्मीर के कई नेताओं का जमावड़ा हो चुका है। कुछ माह पहले उन्होंने अमरनाथ यात्रा के दौरान भी जम्मू-कश्मीर के कई नेताओं से मुलाकात की थी जिसमें जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक, आल इंडिया हुर्रियत कांग्रेस के नरमपंथी गुट के मीरवाइज उमर फारूक व कट्टरपंथी ग्रुप के अली शाह गिलानी प्रमुख थे। रविवार को यहां महाकुंभ क्षेत्र में पहुंचे स्वामी अधोक्षजानंद ने बताया कि हमने उन्हें महाकुंभ में आने के लिए आमंत्रित किया है। मेरा मानना है कि कश्मीर की समस्या राजनीतिक है। इसे मजहबी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। स्वामी अधोक्षजानंद ने कहा कि इसके साथ ही अल्फा के नेताओं राजीव बरुआ और शसधर चौधरी को भी उन्होंने महाकुंभ क्षेत्र में आने का निमंत्रण दिया है। यहां अलगाववादियों के मुद्दों ओर मुख्य धारा में उनकी वापसी के लिए उपायों पर मंथन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंतरिक समस्याएं देश के विकास में बाधा बन रही हैं और इन्हें आपसी बातचीत के जरिए ही खत्म किया जा सकता है। वर्तमान में यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि क्योंकि चीन आदि पड़ोसी देश भारत के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उड़ीसा के पूर्व मुख्यमंत्री गिरधर गोमांग ने महाकुंभ में अपनी संस्था के जरिए सांस्कृतिक कार्यकमों की स्वीकृति दे दी है। 

महाकुंभ: 96 करोड़ से फैला तारों-खंभों का जाल

इलाहाबाद। कुंभ मेला क्षेत्र व आसपास संचार सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बीएसएनएल ने 40 बीटीएस लगा दिए हैं। इन बीटीएस को एक दिसंबर को कार्यरत कर दिया जाना था। यह अलग बात है कि बिजली का थ्री फेज कनेक्शन न मिलने के चलते अभी तक इन बीटीएस की टेस्टिंग और सिंक्त्रोनाइजेशन का कार्य नहीं हो सका है। मेला क्षेत्र में 96 करोड़ रुपये के खर्च से तारों का जाल फैला है। इसमें अभी सिर्फ सिंगल फेज बिजली आपूर्ति ही की जा रही है। इन सब के बीच बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी निर्धारित समय सीमा से पहले अपनी सारी तैयारियां पूरी करने का दावा कर रहे हैं।

गंगा-यमुना के तटवर्ती मैदान में नया शहर बसने जा रहा है। तंबुओं के इस शहर को रोशन रखने की जवाबदारी बिजली विभाग की है। इस शहर को जगमग करने के लिए विभाग ने 96 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। कार्य को पूरा करने के लिए बिजली विभाग को 31 दिसंबर तक का समय दिया गया है। किंतु, विभाग के अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने करीब 75 फीसदी काम पूरा कर लिया है। 25 फीसदी कार्य 15 दिसंबर तक पूरा करके कुंभ मेला क्षेत्र में आपूर्ति पूरी तरह कर दी जाएगी। अधिशासी अभियंता कुंभ मेला (प्रभारी) अनिल वर्मा ने बताया कि कुंभ मेला क्षेत्र में 400 केवीए क्षमता के 48 उपकेंद्र बनाए जाने हैं, जिसमें से करीब 35 का काम पूरा हो गया है। 11 हजार केवी की एचटी लाइन 70 किलोमीटर बिछाई जानी है। इसमें 60 हजार किमी का काम पूरा हो गया है। सात सौ किलोमीटर बिछने वाली एलटी लाइन में चार सौ किलोमीटर का काम हो चुका है। 20 हजार स्ट्रीट लाइट में करीब 15 हजार लग चुकी हैं। दस हाईमास्ट लग चुका है। अरैल व सोमेश्‌र्र्वर महादेव से लेकर नए यमुना पुल तक प्रकाश की व्यवस्था पूरी कर ली गई है। 

बांध के नीचे गंगा के पश्चिम दारागंज की ओर से संगम क्षेत्र में लाइटें लग चुकी हैं। अक्षयवट मार्ग से लेकर बदरा सोनौटी, भारद्वाज मार्ग तक मुख्य सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें लग चुकी हैं। कुंभ मेला के अधीक्षण अभियंता एके मित्तल का कहना है कि 15 दिसंबर तक कार्य पूरा करके कुंभ मेला क्षेत्र में आपूर्ति चालू कर दी जाएगी। जो भी थोड़ी बहुत कमी होगी, उसे भी दूर किया जाएगा।

48 जनरेटर निर्बाध रखेंगे आपूर्ति-

मेले में बिजली चली जाने के बाद भी अंधेरा नहीं होगा। अधिशासी अभियंता कुंभ मेला (प्रभारी) अनिल वर्मा का कहना है कि आकस्मिक स्थिति में भी विद्युत आपूर्ति जारी रखने के लिए 48 जनरेटर की व्यवस्था की गई है। इसमें 63 केवीए के 30, 125 केवीए के 17 व 160 केवीए का एक जनरेटर लगेगा।

फ्री मिलेगी कल्पवासियों को बिजली-

कल्पवासियों को बिजली मुफ्त में मिलती है, लेकिन सिक्योरिटी के नाम पर बल्ब या सीएफएल के लिए 115 रुपये जमा कराए जाते हैं। मेला समाप्त होने के बाद ये रुपये कल्पवासी को वापस कर दिए जाते हैं। बिजली विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मेला क्षेत्र में बने पावर हाउस में लगे मीटर के मुताबिक प्रशासन से भुगतान लेते हैं। कल्पवास, अखाड़े व दुकान लगाने वालों से कोई रुपये नहीं लिए जाते। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सप्ताह भर के भीतर किस अखाड़े में कितनी आपूर्ति देनी है, किस कल्पवास में कितने बल्ब व सीएफएल लगेंगे और कितनी दुकानों में बिजली के कनेक्शन दिए जाएंगे, इसकी सूची दी जाएगी। इसमें दुकानदारों को दिए जाने वाले कनेक्शन का रेट भी रहेगा।


संगम की रेती पर चौकड़ी भर रहे अखाड़ों के अश्व


इलाहाबाद। संगम की धरती पर शनिवार की सुबह घोड़ों को चौकड़ी भरते देख रामायण और महाभारत के उद्धृत वर्णन का स्मरण हो आया। गेरुआ वस्त्र में तीन कम आयु के संत उन पर सवार हवा से बातें कर रहे थे। शनिवार तड़के चाबुक पड़ते ही घोड़े रेत उड़ाते सरपट दौड़ पड़े। देखते ही देखते जूना अखाड़े की जमीन का चक्कर लगाकर रुक गए। इसके बाद अश्वों के साथ तीनों युवा संत गंगा की तरफ बढ़े और वहां गंगा जल का आचमन किया। 

देखने वालों को लगा कि संत अश्वों के साथ अपना मनोरंजन कर रहे हैं, लेकिन वे परंपरा को अंजाम देने में लगे थे। अश्वों की पीठ से जब तीनों संत नीचे उतरे तो उनके मुख की चमक देखते ही बनती थी। अश्वों के साथ सैर की बात छिड़ी तो वे गंभीर हो उठे। ये तीनों जूना अखाड़े के संत थे। संत पशुपति गिरि ने बताया कि वे कोई सैर नहीं कर रहे थे, वे एक पुरानी परंपरा का निर्वहन कर रहे थे। शास्त्रों में विदित है कि किसी भी शुभ कार्य में अश्व और गज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में अश्वों को शुद्ध मानते हुए उनके द्वारा अखाड़े की जमीन की परिक्त्रमा कराने की परंपरा है, उसी को आज संपन्न किया गया। अखाड़े में हाथी भी है। गजराज को गणेश भगवान मानते हैं और उन्हें भी अश्वों के साथ हर सुबह अखाड़े की भूमि पर घुमाया जाता है। यह प्रक्त्रिया भूमि पूजन तक चलती रहेगी। 

 
दैनिक जागरण

भस्म आरती दर्शन जल्द होगी ऑनलाइन


उज्जैन। बाबा महाकाल की भस्म आरती दर्शन अनुमति व्यवस्था शीघ्र ही ऑनलाइन होगी। इसके लिए महाकाल मंदिर पुलिस चौकी के समीप हाईटेक काउंटर का निर्माण किया जा रहा है। काउंटर पर 3 कम्प्यूटर सेट लगाए गए हैं। वेब कैमरे लगाने का काम अभी बाकी है। ऑनलाइन सुविधा के उद्घाटन की तारीख 6 दिसंबर को होने वाली प्रबंध की बैठक में तय की जाएगी। मंदिर प्रशासक जयंत जोशी ने बताया कि ऑनलाइन अनुमति व्यवस्था से स्थानीय के साथ ही देश व दुनिया के श्रद्घालुओं को फायदा होगा। बाहर के श्रद्घालु दर्शन अनुमति के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। स्थानीय श्रद्घालु काउंटर पर फॉर्म जमा करेंगे। कर्मचारी संबंध जानकारी को अंकित करने के पश्चात कम्प्यूटर से बारकोड के साथ फार्म प्राप्ति की रसीद देंगे।श्रद्घालु को दर्शन की अनुमति मिली है या नहीं इसकी जानकारी एसएमएस के जरीए दी जाएगी। दर्शन के वक्त कर्मचारी बारकोड के द्वारा दी गई अनुमति की स्थिति देखकर श्रद्घालुओं को प्रवेश देंगे।
कैमरे में कैद होगी तस्वीर- ऑनलाइन अनुमति काउंटर की तीनों खि़ड़कियों पर वेब केमरे लगाए जाएंगे, जिनसे फार्म जमा करवाने वाले व्यक्ति की तस्वीर कैद होगी। व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के साथ सुरक्षा की दृष्टि से यह कदम उठाया गया है।

सभी का हाथ गंगा का साथ

वाराणसी। गंगा की विरलता-निर्मलता को लेकर गंगा समग्र यात्रा की ओर से चलाए गंगा समग्र आंदोलन के तहत रविवार को गंगा, वरुणा तटों पर मानव श्रृंखला बनायी गई। लोगों ने हाथों से हाथ जोड़ा, गंगा निर्मलीकरण में साथ देने का संकल्प लिया। खास यह था कि इस आंदोलन में जहां युवाओं ने अहम भूमिका निभाई वहीं विदेशी सैलानियों ने भी हाथ से हाथ मिलाकर गंगा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। गंगा समग्र के इस श्रृंखला कार्यक्त्रम में विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भाजपा, भाजपा युवामोर्चा के नेता, कार्यकर्ता शामिल हुए।

गंगा तट पर जुटे युवाओं ने एक दूसरे का हाथ थाम गंगा के लिए हर कुर्बानी का संकल्प लिया। अस्सी घाट पर विद्यार्थी परिषद, महामना मंडल, भायुमो के कार्यकर्ताओं ने केसरिया परिधानों में मानव श्रृंखला बनायी। 

रामनगर के बलुआ घाट पर दैनिक आरती सेवा समिति, संघ, भाजपा के कार्यकर्ताओं ने श्रृंखला बनाई। इसमें काफी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। भाजपा की ओर से वरुणा तटों पर मानव श्रृंखला बनायी गई। 

श्रमदान से घाट की सफाई-
कैथी स्थित गंगा किनारे पूर्व प्रधान घनश्याम सिंह के नेतृत्व में मानव श्रृंखला बनाई गई। इसके पूर्व गंगा किनारे श्मशानघाट पर श्रमदान कर साफ-सफाई की गई। तकरीबन दो घंटे तक चले इस अभियान के दौरान श्रमदान में शामिल बच्चों ने लोगों से गंगा में कूड़ा न फेंकने, गंगा तटों को साफ रखने को कहा। 



रविवार, 2 दिसंबर 2012

खुफिया एजेंसियां डालेंगी संगम नगरी में डेरा

इलाहाबाद। कुंभ के दौरान आतंकी गतिविधियों से निपटने के लिए लोकल इंटेलीजेंस यूनिट और एसटीएफ के साथ एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉयड) का दस्ता भी सक्रिय रहेगा। चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए 16 वॉच टावर लगाए जाएंगे। दिसंबर के अंत तक खुफिया एजेंसियां संगमनगरी में अपना डेरा डाल देंगी। 

सुरक्षा के मद्देनजर पूरे मेला क्षेत्र को छह सेक्टरों में बांटा गया है। हर सेक्टर का प्रभारी एडिशनल एसपी को बनाया गया है। मेला कुल 14 सेक्टरों में बसेगा लिहाजा हर एक जोन में दो या तीन सेक्टर रहेंगे। हर सेक्टर में दो थाने होंगे। इस तरह मेले की सुरक्षा के लिए परेड, झूंसी और अरैल सहित तीन पुलिस लाइन, 30 थाने और 40 चौकियां बनेंगी। इन थानों की निगरानी के लिए 14 क्षेत्राधिकारी और 50 इंस्पेक्टर मौजूद रहेंगे। 30 इंस्पेक्टरों को थानों का प्रभारी बनाया जाएगा। शेष क्राइम ब्रांच और स्पेशल डयूटी में रहेंगे। मेले के दौरान 550 सब इंस्पेक्टरों की भी तैनाती होगी। इनमें से 40 सब इंस्पेक्टरों को पुलिस चौकियों का प्रभारी बनाए जाएगा शेष अन्य थानों और संवेदनशील स्थानों पर तैनात किए जाएंगे। मेले की सुरक्षा के लिए 450 हेड कांस्टेबल और 5800 सिपाही भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा सेना, अ‌र्द्वसैनिक बल और खुफिया एजेंसियों की भी मदद ली जाएगी। आतंकी घटनाओं पर नजर रखने के लिए एटीएस और एसटीएफ का दस्ता दिसंबर के अंतिम सप्ताह में यहां आ जाएगा। 

हर घाट पर मौजूद रहेगी जल पुलिस- 

कुंभ के दौरान सभी प्रमुख 29 स्नान घाटों पर जल पुलिस के जवान मौजूद रहेंगे। जल पुलिस के दस्ते में एक एक सीओ, एक इंस्पेक्टर, 10 सब इंस्पेक्टर और पीएसी की आठ फ्लड कंपनियां शामिल होंगी। हर कंपनी के पास 17-17 नावें होंगी।

यातायात पुलिस भी रहेगी सक्रिय-

कुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यातायात पुलिस के जवान भी तैनात रहेंगे। मेला डयूटी में तीन ट्रैफिक इंस्पेक्टर, 12 टै्रफिक सब इंस्पेक्टर के साथ 350 हेड कांस्टेबल और कांस्टेबलों को लगाया जाएगा। 

प्रमुख स्नान पर्वो पर नो इंट्री-

प्रमुख स्नान पर्वो के दौरान वीवीआइपी वाहनों की भी मेला क्षेत्र में नो एंट्री रहेगी। सभी श्रद्धालुओं को मेला क्षेत्र में पैदल ही प्रवेश करना होगा। इस संबंध में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय की ओर से दिसंबर में ही निर्देश जारी कर दिया जाएगा। 

गुरुनानक देव जी का मना प्रकाशोत्सव

वाराणसी,इलाहाबाद। सिख समुदाय के प्रथम गुरु गुरुनानक देव जी महाराज का 543 वां प्रकाश उत्सव बुधवार को धूमधाम से मनाया गया। सिख घरों में विशेष सजावट की गई थी। लोगों ने एक दूसरे को पर्व की बधाई दी। मुख्य आयोजन गुरुद्वारा गुरुबाग में हुआ। सुबह से देररात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इसमें सिख समुदाय के अलावा अन्य धर्मावलम्बी भी शामिल थे। अल-सुबह 3.30 से 4.15 तक गुरुग्रंथ साहिब जी महाराज का शाहाना स्वागत किया गया। सुबह से दोपहर तक व शाम से रात तक भाई मनप्रीत सिंह कानपुरी, भाई सिमरनजीत व भाई गुनदीप सिंह हजूरी रागी जत्था (अमृतसर) ने शबद कीर्तन से संगत को निहाल किया। सतिगुरु नानक प्रगटिआ-मिटी धुधु जगि चानणु होआ, जिउ करि सूरज निकलिआ तारे छिपे अंधेर पलोआ। 

शबद कीर्तन के दौरान काफी लोग उपस्थित थे। रात को अखण्ड पाठ की समाप्ति हुई। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से आयोजित समारोह में लोगों के उल्लास का ठिकाना नहीं रहा। सिख धर्म के विद्वान भाई गुरुदास की वाणी को सुंदर ढंग से पेश किया-सुनि पुकार दातार प्रभु गुरुनानक जग मोहि पठाया, कलयुग बाबे तारिया सतनाम पढ़ मंत्र सुनाया.इसके अलावा संगीतमय प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय बना दिया-जिनी नामु धिआइया, गए मसकति घालि, नानक, ते मुख उजले, केती छुट्टी नालि। तत्पश्चात सुनाया-सति गुरुनानक प्रगटिआ मिटी धुंधुजागी चनाणु हैआ, जिऊ करि सूरज निकलिआ, जिऊ करि सूरज निकलिआ तारे छिपे अंधेर पलोआ। कीर्तन के दौरान सम्पूर्ण गुरुद्वारा खचाखच भरा था। इनके अलावा सनबीम स्कूल के बच्चों ने दीपक मधोक व भारती मधोक के निर्देश पर हुए कीर्तन से संगत को निहाल किया। सभी पुरुष, महिलाओं व बच्चों के सिर ढके थे। गुरुनानक खालसा बालिका इंटर कालेज के प्रांगण में सायं 4 बजे तक गुरुमहाराज का अटूट लंगर चला। इसको हजारों लोगों ने चखा। प्रकाश उत्सव के अवसर पर गुरुद्वारा की आकर्षक सजावट की गई थी। 

विदेशों में विभिन्न नामों से याद करते हैं गुरुनानक देव जी महाराज को सिख धर्म के प्रथम गुरु गुरुनानक देव जी महाराज को विभिन्न नामों से याद किया जाता है। गुरुद्वारा गुरुबाग के मुख्यग्रंथी भाई सुखदेव सिंह ने बताया कि अरब देशों में पीरबाबा नानक शाह, तिब्बती लोग नानकलामा या भद्रागुरु के नाम से पूजते हैं। श्रीलंका में नानक बुद्धा के नाम से प्रचलित हैं। भूटान, सिक्किम, नेपाल आदि देशों में रिमपोजे के नाम से श्रद्धा के सुमन अर्पित करते हैं।

वाहेगुरु के जाप में रमे रहे भक्त- 

धार्मिक एकता के प्रतीक, मानवता के महान पुजारी सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरुनानक देव जी के प्रकाश उत्सव पर श्रद्धा और उल्लास का माहौल रहा। बुधवार की सुबह से गुरुद्वारों में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। बुजुर्ग, युवा, महिला, बच्चे मन ही मन वाहे गुरु-वाहे गुरु का जाप करते हुए श्रीगुरु ग्रंथ साहिब की दर पर मत्था टेका। खुल्दाबाद गुरुद्वारा में श्री गुरु सिंह सभा की ओर से आयोजित प्रकाश उत्सव में दिल्ली से आए भाई बलजीत सिंह, भाई गुरमीत सिंह ने नीचा अंदर नीच जात नींची हूं अति नीच-नामक तिनके संग साथ वडियां स्यों क्या रीस।। से गुरु की महिमा का बखान किया। भाई बलजीत सिंह ने बताया कि गुरु नानक ने स्वयं के सिद्धांतों पर चलकर जात-पात के भेदभाव को मिटाने का काम किया था। हमें गुरु के बताए मार्ग पर चलकर धार्मिक एकता के लिए काम करना चाहिए। हजूरी रागी भाई मंजीत सिंह ने कहा कि मानव की सेवा करना ही गुरुनानक का सच्चा संदेश है जिसका सबको पालन करना चाहिए। इसके बाद विशाल लंगर का आयोजन हुआ, जिसमें हर जाति-धर्म के लोगों ने प्रसाद छका। श्री गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष सरदार जोगिंदर सिंह ने लोगों का आभार व सरदार प्रीतम सिंह ने संचालन किया। वहीं गुरुद्वारा पक्की संगत में सुबह सबद-कीर्तन का आयोजन हुआ। गुरुद्वारा मीरापुर में भजन-कीर्तन के साथ लंगर का आयोजन हुआ। सिख संगत की ओर से सदियापुर में धार्मिक कार्यक्त्रम का आयोजन हुआ। 

सामाजिक एकता का दिया संदेश-

गुरुनानक के पावन प्रकाश उत्सव सिविल लाइंस स्थित आइस फैक्ट्री में श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। सुबह तीन दिनों से चल रहे श्री अखंड पाठ साहिब की समाप्ति हुई। फिर रागी जत्था हरवेंदर सिंह एवं महंत देवेंदर सिंह, ज्ञानी बाज सिंह, भाई गुरप्रीत सिंह ने हृदयस्पर्शी कीर्तन से भक्तों को निहाल कर दिया। शाम को गोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें संग्रहालय के निदेशक राजेश पुरोहित ने कहा कि गुरुनानक ने सामाजिक एकता व प्रेम का संदेश दिया, जिसका हर मानव को अनुसरण करना चाहिए। 


हजारों लोगों ने फल्गु में लगाई डुबकी

गया। कार्तिक मास की पूर्णिमा को लेकर बुधवार अंत:सलिला फल्गु नदी में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किए। स्नान करने के बाद विष्णुपद मंदिर में पूजा अर्चना की। बुधवार की सुबह से ही स्नान करने वालों की भीड़ इस नदी के विभिन्न घाट पर देखी गई।

विशेषकर महिलाओं की भीड़ थी। जिनमें वैसी महिलाएं जो पूरे कार्तिक महीने में पवित्र स्नान के व्रत को रखी थीं। वे अंतिम दिन पूर्णिमा स्नान करने के बाद दान आदि पुनीत कार्य की। विष्णुपद मंदिर में पूजा-अर्चना को ले श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से भी पवित्र स्नान को काफी संख्या में लोग फल्गु नदी के देवघाट, पितामहेश्‌र्र्वर घाट, रामशिला घाट आदि घाटों पर पहुंचे। निगम तथा जिला प्रशासन की तरफ से श्रद्धालुओं के लिए कुछ विशेष व्यवस्था की गई थी। 

वहीं, दूसरी ओर नवनिर्मित रामशिला घाट पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। यहां स्नान के बाद रामशिला स्थित गणेश व शिव मंदिर में लोगों ने पूजा अर्चना की। 

संतों ने किया दूसरा शाही स्नान

बटेश्वर। कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर यूं तो देशभर से आये लाखों श्रद्धालुओं ने मोक्षदायिनी यमुना में स्नान कर भोले का अभिषेक किया। लेकिन इस पर्व के मौके पर साधु-सतों ने तीर्थ की परिक्रमा देकर दूसरा शाही स्नान किया। परिक्रमा मार्ग पर अस्त्र-शस्त्रों से हैरतअंगेज करतब भी दिखाए। 

कार्तिक पूर्णिमा को मुख्य स्नान पर्व पर पांचवें महाकुंभ के दूसरे शाही स्नान के लिए तीर्थ हजारों साधु, संतों की भीड़ उमड़ी। साधु-संतों और नागा बाबाओं ने बाबा बालकदास के नेतृत्व में तीर्थ की परिक्रमा दी। परिक्रमा के दौरान संत मुख्य मंदिर से जैन मंदिर शौरीपुर, वनखंडेश्‌र्र्वर मेला मार्ग, हनुमान गढ़ी, मनमथ वैराग्य बस्ती, गोकुलनाथ मंदिर से होते हुए पुन: मुख्य मंदिर पहुंचे। परिक्रमा के दौरान साधु, संतों नागा बाबाओं ने तलवार, भाला, फरसा, लाठी, गदा आदि अस्त्र-शस्त्रों से हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया। तीर्थ में बाबा बालकदास व अन्य साधु, संतों ने हरि की पौढ़ी पर दूसरा शाही स्नान किया। शाही स्नान के बाद साधु-संतों को प्रसाद देकर विदाई दी गई। संतों ने बताया कि जिला पंचायत द्वारा इस वर्ष परिक्रमा मार्ग की सफाई ठीक नहीं करायी गई है। मनमथ से गोकुल नाथ मार्ग में संतों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। संतों की ओर से बताया गया कि तीसरा व अंतिम शाही स्नान दौज के मौके पर तीस नवंबर को होगा।



पाक में 100 साल पुराना मंदिर तोड़ा गया, हिंदुओं में उबाल

 कराची।। पाकिस्तान के कराची में एक 100 साल पुराने मंदिर को जबरन ढहा दिए जाने से वहां के अल्पसंख्यक हिंदुओ में उबाल है। मंदिर को लेकर अदालत में मामला लंबित होने के बावजूद एक बिल्डर ने शनिवार को इसे जबरन ढहा दिया। कराची के सोल्जियर बाजार में स्थित विभाजन से पहले के श्रीराम पीर मंदिर को ढहाने के अलावा बिल्डर ने पास के कई मकान भी तोड़ दिए। इससे करीब 40 लोग बेघर हो गए, जिनमें से ज्यादातर हिंदू हैं।

पाकिस्तान हिंदू काउंसिल ने रविवार दोपहर कराची में प्रेस क्लब के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने बिल्डर द्वारा मंदिर और मकानों को तोड़े जाने तथा प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं किए जाने का विरोध किया। श्री राम पीर मंदिर को ऐसे समय में तोड़ा गया जब सिंध हाई कोर्ट इसे ढहाने पर स्टे लगाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

प्रकाश नामक एक नाराज व्यक्ति ने कहा, 'उन्होंने हमारा मंदिर तोड़ दिया और हमारे देवी-देवताओं का अपमान किया।' कहा जाता है कि मंदिर तोड़ने के लिए आए दल ने ऐसा करने से पहले हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां एकतरफ रख दीं। स्थानीय लोगों ने मूर्तियों से गहने और मुकुट चुराने का आरोप भी लगाया है।

एक अन्य व्यक्ति लक्ष्मण ने अपनी बांह पर जख्म के निशान की ओर इशारा करते हुए कहा, 'जब मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की, तब उन्होंने मुझे बंदूक से मारा। मैंने उनसे कहा कि मेरी जान ले लो, लेकिन मेरे पवित्र धर्मस्थल को नष्ट मत करो।'

बनवरी नामक एक महिला ने कहा, 'कुछ ही मिनटों में अपना घर नष्ट होते हुए मैं देखती रही, लेकिन कुछ कर नहीं पाई।' उन्होंने बताया कि इस कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को पुलिस और अर्धसैनिक पाकिस्तान रेंजर्स ने घेर लिया था। किसी भी बाहरी व्यक्ति को इलाके में नहीं जाने दिया जा रहा था। जिन 40 लोगों के मकान तोड़ दिए गए, उनमें श्वेता नाम एक महिला भी है जिनके पति कराची से बाहर हैं। श्वेता ने कहा कि उन्होंने और उनके बच्चों ने खुले में रात गुजारी। काली दास नामक एक व्यक्ति ने बताया कि जो मकान तोड़े गए हैं, उनमें हिंदू परिवार रहते हैं।  



 

शनिवार, 1 दिसंबर 2012

पद्मनाभस्‍वामी मंदिर: SC में समिति की रिपोर्ट पर सुनवाई

 
 
नई दिल्‍ली : केरल के श्री पद्मनाभस्‍वामी मंदिर को लेकर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होगी। रिपोर्टों के अनुसार, शीर्ष कोर्ट इस मंदिर के कुछ तहखानों से मिले सदियों पुराने खजाने को लेकर एक पूर्ण जांच रिपोर्ट दायर करने को लेकर समयसीमा पर निर्णय दे सकती है।

हालांकि, विशेषज्ञ समिति मंदिर को लेकर पूरी रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अगस्‍त, 2013 तक का समय चाहती है। गौर हो कि जुलाई, 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने 16वीं सदी के इस मंदिर के तहखानों में रखे खजानों को लेकर एक समिति का गठन किया था। इस मंदिर में अभी एक तहखाने को खोला जाना बाकी है।

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के खजाने का वैज्ञानिक तरीके से दस्तावेजीकरण तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समिति ने पिछले साल भूमिगत तहखाने को खोलकर अपना काम शुरू किया था। समिति के सदस्यों ने तहखानों का निरीक्षण करने के बाद आधुनिक उपकरण की मदद से दस्तावेजीकरण किया।


प्रख्यात पर्यावरणविद एमवी नायर के नेतृत्व वाली समिति ने स्वर्ण एवं कीमती रत्नों के मूल्य और प्राचीनता का आकलन करने के लिए अनुभवी विशेषज्ञों की एक सूची दी थी। इस अवसर पर निगरानी समिति के सदस्य भी मौजूद थे जिन्हें पिछले साल अमूल्य खजाने की सूची तैयार करने का दायित्व सौंपा गया था।

निगरानी समिति भी उच्चतम न्यायालय द्वारा स्थापित की गई थी। इसने पिछले साल मंदिर के छह तहखानों में से चार तहखानों को खोला था और वहां अनमोल खजाना मिला था, जिससे दुनिया का ध्यान इस मंदिर और इसके इतिहास की ओर गया था। हालांकि समिति के दायित्व में खजाने का मूल्य आंकने का काम शामिल नहीं था, लेकिन व्यापक तौर पर ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि इसका मूल्य एक लाख करोड़ रुपये से अधिक है।