मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

दुनिया का पहला एसएमएस था 'मेरी क्रिसमस'


क्रिसमस की तैयारियां जोर-शोर पर हैं। जाहिर है एक-दूसरे को बधाई के साथ यादगार तोहफे भी दिए जाएंगे। मगर, ये कम लोग ही जानते होंगे कि दुनिया को एसएमएस (शॉर्ट मैसेज सर्विस) का तोहफा भी 'क्रिसमस' की खुशियों के बीच ही मिला है। 

21 साल पहले एक इंजीनियर ने अपने दोस्त को एसएमएस से पहली दफा क्रिसमस की बधाई दी और इतने सालों में एसएमएस बन गया लगभग हर इंसान की एक जुबां। एसएमएस का जन्म 3 दिसंबर 1992 को हुआ था। लंदन निवासी 22 वर्षीय इंजीनियर नील पेप वॉथ ने अपने टाइप राइटर से अपने दोस्त रिचर्ड जारवर के मोबाइल फोन पर मैरी क्रिसमस का बधाई संदेश एसएमएस के जरिए भेजा था। उस समय उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि आने वाले समय में बधाई संदेश भेजने के लिए एसएमएस का ही सबसे ज्यादा प्रयोग होगा। 21 साल में एसएमएस दुनिया में छा गया है।

टेली कम्युनिकेशन कंपनियों का बढ़ा बिजनेस-इस सेवा को हर आदमी के हाथ में पहुंचाने का काम किया मोबाइल कंपनी नोकिया ने। नोकिया ने सबसे पहले जीएसएम हैंडसेट बनाकर इसे आसान कर दिया। इसके बाद एसएमएस की दुनिया में क्रांति आ गई। सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को एसएमएस के जरिए अच्छा बिजनेस मिला। 1998 में हुए एक सर्वे के अनुसार, एक महीने में चार मैसेज भेजे जाते थे। 

वहीं, 2010 में पूरे विश्व में 6.1 टिलियन मैसेज भेजे गए। यानी एक सेकंड में औसतन 1,93,000 मैसेज भेजे गए। 

प्यार की भाषा बना एसएमएस-एक समय था जब कबूतर के जरिए प्यार का इजहार करने के लिए खत भेजे जाते थे। समय बदला तो कबूतर की जगह डाक सेवा आ गई। इसके बाद आइटी युग की शुरुआत हुई। मोबाइल फोन आए तो प्यार का इजहार आसान हो गया। धीरे-धीरे एसएमएस का प्रचलन बढ़ा तो दिलों की दूरियां कम हुईं। एसएमएस प्यार की भाषा बन गया। कॉलेज में पढ़ने वाले, नौकरी पेशा युवा में एसएमएस का सबसे ज्यादा चलन है।

जगमग हुए चर्च, आज जन्मेंगे यीशु

प्रेम, करुणा और शांति का संदेश देने वाले प्रभु यीशु का जन्म मंगलवार आधी रात को होगा। जिसके लिए गिरजाघरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। चर्च परिसर रंगीन रोशनी से झिलमिला रहे हैं, झांकियां सज चुकी हैं। 

क्रिश्चियन समाज के लिए मंगलवार की रात खुशियां लेकर आएगी। आधी रात को बालक यीशू का जन्म होगा। घंटे घड़ियाल बजेंगे, मोमबत्तियां झिलमिलाएंगी, विशेष प्रार्थना सभा होंगी, बधाई गीत गाए जाएंगे। निष्कलंक माता के महागिरजाघर के फादर जो थाइकटिल ने बताया कि दिसंबर से क्रिश्चियन समाज द्वारा आगमन काल मनाया जा रहा था। जिसके तहत सभी सभी ने परहेज रखा, नियमित माला विनती की। इसके बाद कैरल सिंगिग हुआ। घर-घर जाकर युवाओं ने क्त्रिसमस गीत गाए। मुख्य आयोजन सेंट पीटर्स परिसर में क्रिसमस का प्रमुख आयोजन वजीरपुरा रोड स्थित निष्कलंक माता के महागिरजाघर, अकबरी चर्च और सेंट पीटर्स स्कूल में होगा। दोनों चचरें पर आकर्षक लाइटिंग की गई है। फादर जोन डिकूना ने बताया कि मंगलवार को यहां रात 11 बजे क्रिसमस गीत शुरू हो जाएंगे। 11.30 बजे विशेष पूजन शुरू होगा। भक्ति गीतों के मध्य बाइबिल का पाठ होगा। 

महाधर्माध्यक्ष डॉ.अल्बर्ट डिसूजा क्रिसमस का संदेश देंगे। मध्य रात्रि 12 बजे यीशु का जन्म होगा। सभी एक दूसरे को बधाइयां देंगे। निष्कलंक माता के महागिरजाघर के बाहर गौशाला की आकर्षक झांकी सजाई गई है, अकबरी चर्च के बाहर भी झांकी सजी हुई है। वहीं सेंट पीटर्स कॉलेज में आधा दर्जन से अधिक झांकियां सजाई गई हैं। जिनमें प्रभु का मानव रूप में आगमन, पापाचार के कारण सृष्टि का विनाश आदि प्रमुख हैं। 25 दिसंबर को ये दोनों गिरजाघर नागरिकों का लिए पूरे दिन खुले रहेंगे। इसके लिए सेंट पीटर्स कॉलेज के दोनों गेट खुले रहेंगे। एक से प्रवेश और दूसरे से निकास होगा। चर्च के बाहर खेल, तमाशे वाले रहेंगे। जिससे पूरे दिन मेला जैसा माहौल रहेगा।
रात्रि 9.30 बजे शुरू हो जायेगा कार्यक्रम-

अमन के राजकुमार प्रभु यीशु मसीह के जन्म में अब अधिक देर नहीं। जनपद का पूरा क्रिश्चियन समाज इस सेलिब्रेशन के लिये तैयार है। चर्च ही नहीं इस समाज से जुड़े अधिकतर लोगों के घर-प्रतिष्ठान भी सतरंगी रोशनी से रोशन होने लगे हैं। मकानों की छतों पर स्टार और आंगन में चरनी तथा क्रिसमस ट्री भी रोशनी से सजाये गये हैं।
प्रेम, करुणा और सदभावना का संदेश देने वाले प्रभु यीशु मंगलवार-बुधवार की मध्य रात्रि अवतरित होंगे। छतों पर तारे चमक रहे हैं और रसोईघर केक व पकवानों की सुगंध से महक रहे हैं।
कैरोल गीतों में क्रिसमस का उल्लास दिखाई दे रहा है। 'आया है यीशु आया है, मुक्ति ले साथ आया है ' जैसे अनेक गीत हैं जिसे ईसाई समाज 24 दिसंबर की मध्य रात्रि तक गाकर यह संदेश देगा कि प्रभु यीशु धरा पर अवतरित होने वाले हैं। घरों के आंगन में चरनी सजायी जा रही है। मतलब यह कि प्रभु यीशु के जन्म को मूर्तियों के जरिये दर्शाया जा रहा है।

कैरोल सांग भजन समान होते हैं। क्रिसमस के अवसर पर ईसाई समाज इसका गायन करता है। गायन के जरिये प्रभु यीशु की महिमा, उनके जन्म की परिस्थितियां, यीशु के संदेश और मां मरियम द्वारा सहे गये कष्टों के बारे में जानकारी दी जाती है। कैरोल गाने के बाद चॉकलेट और मीठे बिस्किट का सेवन करने की प्रथा है। प्रभु यीशु के जन्म लेने से पहले फरिश्तों ने उनकी माता मरियम और पिता युसूफ को यह संकेत दिया था कि यीशु का जन्म होने वाला है। कैरोल सिंगिंग की परंपरा तभी से है।

दिसंबर की रात्रि करीब साढ़े नौ बजे क्रिश्चियन समाज के लोग चर्चो पर एकत्रित होकर मसीह संगीत का गायन शुरू करेंगे। यह दौर मध्य रात्रि तक जारी रहेगा। रात्रि बारह बजते ही चर्चो में प्रभु यीशु का जन्म हो जायेगा। इसकी खुशी में घंटे-घड़ियाल बजेंगे। चर्चो में प्रार्थना सभाएं होंगी। इस मौके पर पादरी देश, समाज और राजनीति की शुद्धता आदि के लिये प्रार्थना सभाएं करेंगे। प्रभु यीशु के अवतार लेने की वजह आदि की जानकारी दी जायेगी। इसके बाद सभी लोग अपने-अपने घर चले जायेंगे। 25 दिसंबर को प्रात: नये कपड़ों में सज-धजकर लोग करीब नौ बजे चर्चो में जायेंगे। यहां प्रार्थना आदि कार्यक्रम होंगे।

Source : Dainik Jagran

सोमवार, 14 जनवरी 2013

महाकुंभ एक दृष्टि में

मकर संक्रांति (शाही स्नान) 

14.जनवरी 2001 को एक करोड़ श्रद्धालु थे। इस बार 110 लाख का अनुमान है।

2001 में 1495.31 हेक्टेयर, 2007 अर्धकुंभ में 1613.80 हेक्टेयर व इस बार के कुंभ में 1936.56 हेक्टेयर में मेला क्षेत्र बसाया गया है।

2001 कुंभ में मेला क्षेत्र 11 सेक्टर में विभक्त था। 2007 अर्धकुंभ में भी इतने ही सेक्टर थे। इस बार सेक्टर संख्या 14 है।

2001 में 35, 2007 में 44 पार्किंग स्थल थे, इस बार 99 प्वाइंट बनाए गए हैं।

2001 में 28 पुलिस स्टेशन बनाए गए थे, 2007 में भी इतनी संख्या थी। इस बार 30 पुलिस स्टेशन स्थापित किए गए हैं।

2001 में 9965, 2007 में 10913 व इस बार 12461 पुलिस कार्मिक लगाए गए।

2001 में एक भी सीसी कैमरा नहीं लगाया गया था, 2007 में 19 कैमरे लगाए गए थे जबकि इस बार इनकी संख्या 85 है।

कुंभ मेला 2001-44 दिनों के लिए आयोजित था, जबकि कुंभ 2013 कुल 55 दिनों के लिए होगा।

पौष पूर्णिमा 9.जनवरी 2001 को 50 लाख श्रद्धालु थे। इस बार 55 लाख का अनुमान है।

मौनी अमावस्या (शाही स्नान) 24.जनवरी 2001 को 276 लाख श्रद्धालु थे। इस बार तीन करोड़ का अनुमान है।

बसन्त पंचमी (शाही स्नान) 29जनवरी 2001 को 175 लाख श्रद्धालु थे। इस बार 193 लाख का अनुमान

माघी पूर्णिमा 8.फरवरी 2001 को 150 लाख श्रद्धालु थे। इस बार 165 लाख का अनुमान है।

महाशिवरात्रि 21.फरवरी 2001 को 50 लाख श्रद्धालु थे। इस बार 55 लाख का अनुमान है।


लाखों लोगों ने संगम में लगायी डुबकी

इलाहाबाद: इलाहाबाद में ‘महाकुंभ’ के पहले दिन आज नगा साधुओं, अन्य साधुओं और संतों के अलावा लाखों की संख्या में लोगों ने गंगा, यमुना और सरस्वती (अब लुप्त हो चुकी हैं) के संगम में स्नान किया.

मकर संक्राति के अवसर पर आज सूर्योदय होने के साथ ही भारी संख्या में ‘महानिर्वाणी अखाडा’ और ‘अटल अखाडा’ के साधुओं तथा नाग साधुओं का ‘शाही स्नान’ आरंभ हो गया. ‘शाही स्नान’ का नजारा देखने लायक था. एक ओर बडी संख्या में लंगोट पहने या फिर निर्वस्त्र भस्म लपेटे नगा साधु संगम की ओर बढ रहे थे तो दूसरी ओर विभिन्न अखाडों और अन्य साधु समुदायों के ‘महामंडलेश्वरों’ धर्मगुरुओं की सजी संवरी पालकियां चल रही थीं. कुछ सजे-धजे हाथियों पर सवार थे तो कुछ ने घोडों की सवारी की.

नगा साधुओं के शरीर पर जहां गेंदे के फूलों और रुद्राक्ष की मालाएं नजर आ रही थीं वहीं दूसरी ओर अन्य साधुओं ने सोने के मुकुट और अन्य गहने पहने हुए थे. हजारों की संख्या में आम लोग और विदेशी ‘शाही स्नान’ को देखने आए थे. भारत की विविधता में एकता का यह संगम बहुत ही सुन्दर था. संगम पर पहुंचकर सभी साधुओं ने अपने पारंपरिक अस्त्रों जैसे त्रिशूल, धनुष और तलवारों की पूजा की और फिर स्नान से पहले अपने इष्ट की पूजा की. ‘महानिर्वाणी अखाडा’ और ‘अटल अखाडा’ के बाद 11 अन्य अखाडों का जुलूस निकला. सभी अखाडों को उनमें शामिल लोगों की संख्या के आधार पर आधे घंटे से एक घंटे का समय दिया गया था. 

इन अखाडों की स्थापना आठवीं सदी में आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म की रक्षा और प्रचार के लिए की थी. समय के साथ-साथ इन अखाडों की संख्या में वृद्धि होने लगी और हर 12 वर्ष के बाद आयोजित होने वाले ‘महाकुंभ’ में इनकी भूमिका निर्णायक होती है. ‘शाही स्नान’ के जुलूस में सबसे बेमेल बात रही द्वारका पीठ और ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्यों का भाग ना लेना. इलाहाबाद में ‘महाकुंभ’ का आयोजन द्वारका पीठ के शंकराचार्य और ज्योर्तिपीठ बद्रीकाश्रम स्वामी स्वरुपानंद के नियंत्रण क्षेत्र में हो रहा है. 

मेला में मौजूद ज्योर्तिपीठ बद्रीकाश्रम के शंकराचार्य के करीबी सहयोगी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया, ‘‘स्वामी स्वरुपानंद ने देश में उग आए स्वयंभू संतों से शंकराचार्य को अलग करने के लिए आदि शंकराचार्य के नियमानुसार चारों पीठों के लिए चतुष्पथ बनाने की मांग की थी. लेकिन प्रशासन ने अनुरोध को नई परंपरा आरंभ करने तुल्य बताते हुए अस्वीकार कर दिया.’’ इलाहाबाद के डिवीजनल आयुक्त देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि आज संगम में 80 लाख से ज्यादा लोगों ने स्नान किया. अभी भी बडी संख्या में लोग संक्रांति के स्नान के लिए आ रहे है और इसके देर रात तक चलने की संभावना है अधिकारियों के अनुसार पूरे मेले में कहीं से भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है.


रविवार, 16 दिसंबर 2012

पौष मास में जगाएं आध्यात्मिक ऊर्जा

पौष मास को लेकर लोगों में अनेक भ्रांतियां हैं। इस मास में मांगलिक कार्यो का विधान न होने से लोग मान लेते हैं कि यह अत्यंत निकृष्ट मास है। लोग मानते हैं कि यह शुभ कामों में नेष्ट (खराब) फल देता है, जबकि ऐसा नहीं है। ऋषि-मुनियों ने पौष मास को सांसारिक कार्यो के लिए निषिद्ध सिर्फ इसलिए किया था, ताकि लोग इस मास में इन कार्यो से अवकाश लेकर आध्यात्मिक तरीके से आत्मोन्नति कर सकें और अपनी ऊर्जा को सक्रिय कर सकें।

पौष मास में अधिकांशत: सूर्य धनु राशि में रहता है। ज्योतिष शास्त्र में धनु राशि का स्वामी बृहस्पति को माना गया है। मान्यता है कि देवताओं के गुरुदेव बृहस्पति उनके परामर्शदाता होने के साथ-साथ मनुष्यों को भी धर्म-सत्कर्म का ज्ञान देते हैं। ऋषियों ने सौर धनु मास को खर मास का नाम इसलिए दिया ताकि लोग इसमें सांसारिक कामों शादी, गृह प्रवेश आदि से मुक्त रहकर इस मास का उपयोग अपने आध्यात्मिक लाभ के लिए कर सके। अपने लिए तो इंसान सब कुछ करता है, लेकिन परहित के लिए भी वह काम करे। आत्मोन्नति के लिए सत्संग, तीर्थाटन, स्वाध्याय, ग्रंथों का अध्ययन और जरूरतमंदों की सेवा कर सके। देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु में आत्मा कारक सूर्य की स्थिति जप-तप, पूजा-पाठ, ध्यान-योगाभ्यास के लिए प्रेरणादायक होती है। हम इस अवधि में आध्यात्मिक साधना करके चंचल मन पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार, इस कालखंड में प्राकृतिक ऊर्जा इंद्रिय-निग्रह में सहायक होती है। चित्त सांसारिक वैराग्य की ओर सहज ही उन्मुख हो उठता है। वैराग्य के लिए स्वांग रचने की आवश्यकता नहीं। वैरागी बनने का ढोंग करना ही मिथ्याचार है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण एक श्लोक में कहते हैं कि जो पुरुष कर्र्मेद्रियों को हठ से रोककर इंद्रियों के भोगों का मन से चिंतन करता रहता है, वह मिथ्याचारी है। वस्तुत: वैराग्य का तात्पर्य संसार को छोड़कर सिर मुड़ाना या जोगिया कपड़े पहनना नहीं है, बल्कि वैराग्य का वास्तविक अभिप्राय संसार में रहकर गृहस्थ जीवन के कर्तव्य का पालन करते हुए दुष्कर्र्मो और पाखंड से विरक्ति है। वैराग्य संयम की शक्ति से पोषित होता है, लेकिन आज समाज में आत्म संयम का अभाव दिख रहा है। मन पर विवेक का अंकुश होने पर ही व्यक्ति संयमी हो सकता है। धनु मास में हम आध्यात्मिक ऊर्जा को अपने में उतार सकते हैं।

रोज की दौड़-भाग भरी जिंदगी में हमारी ऊर्जा का क्षरण होता रहता है। यह जानते हुए भी हम सांसारिक भोगों के आकर्षण से बच नहीं पाते। पौष मास हमें संयमी बनाकर आध्यात्मिक ऊर्जा के संचय का सुअवसर प्रदान करता है। ऐसे उपयोगी कालखंड को खर मास कहकर इसकी उपेक्षा करना उचित नहीं है। सूर्य के तेज और देवगुरु की दिव्यता से संपन्न पौष मास आध्यात्मिक रूप से समृद्धि दायक है।


शनिवार, 8 दिसंबर 2012

सात फरवरी को संत सम्मेलन में बनेगी रणनीति


इलाहाबाद। संगम तट पर त्याग और तपस्या का मेला कुंभ जल्द ही पूरे शबाब पर होगा। तीर्थराज प्रयाग की पावन भूमि पर लगने वाले इस मेले में मोक्ष की आस में जहां लाखों लोग संगम की रेती पर जप-तप करेंगे। वहीं धार्मिक नगरी में विश्व हिंदू परिषद के आला रणनीतिकारों का जमघट लगेगा, जो अयोध्या में श्रीराम की जन्मस्थली पर मंदिर निर्माण की रणनीति तैयार करेंगे। उसी के अनुरूप देशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा। विहिप यह काम खुद के बजाय संतों के नेतृत्व में करेगा ताकि आम जनमानस पर उसका प्रभाव पड़े। विहिप ने इसके लिए कुंभ में छह और सात फरवरी को संत सम्मेलन का आयोजन किया है जिसमें करीब 20 हजार संत-महात्मा शामिल होंगे। 

लोकसभा चुनाव से पहले हो रहे इस कुंभ मेले पर सबकी नजर है। खासकर विहिप के रणनीतिकार इसे काफी गंभीरता से ले रहे हैं क्योंकि यह एकमात्र ऐसा स्थल है जहां लाखों लोगों तक वह अपनी बात को आसानी से पहुंचाने के साथ सीधा संपर्क स्थापित कर सकते हैं। वर्ष 2013 में अयोध्या में विवादित ढांचा गिरने के 21 साल पूरे होंगे जिसे देखते हुए विहिप इस मामले में ठोस फैसला लेकर व्यापक आंदोलन शुरू करेगा, जिससे हिंदू जनमानस एकजुट होकर उनके पाले में आए। इस सिलसिले में विहिप की संत उच्चाधिकार समिति के अध्यक्ष गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ और संयोजक स्वामी परमानंद सक्रिय हैं। विहिप के प्रदेश प्रवक्ता शरद शर्मा के अनुसार विहिप का हर कार्य संतों के आशीर्वाद से हुआ है, आगे भी हम उसी के अनुरूप काम करेंगे। 


महाकुंभ: अखाड़े का नगर प्रवेश

इलाहाबाद। चांदी के हौदे में सवार संतों का कारवां सड़क पर निकला तो हर किसी की आंखें उनके ऊपर टिक गई। कोई जयकारा लगाता कोई उनके स्वागत में हाथ जोड़कर खड़ा हो जाता। श्रद्धा से ओतप्रोत अनेक लोगों ने संतों के ऊपर पुष्पवर्षा करके प्रयाग में उनका भव्य स्वागत किया। यह नजारा मंगलवार को देखने को मिला। कुंभ मेला के लिए आहृवान अखाड़ा का नगर प्रवेश हुआ। वाराणसी से आए अखाड़े के महंत शाही अंदाज में शहर पहुंचे। बैंडबाजा, ध्वज-पताका, हाथी, घोड़ा के साथ सैकड़ों संतों का कारवां सड़क पर निकला तो लोगों की उत्सुकता बढ़ गई। संतों को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर भीड़ जुटी। जुलूस का नेतृत्व रमता पंच के श्रीमहंत श्रीमहंत नीलकंठ गिरि, श्रीमहंत कैलाशपुरी व श्रीमहंत सत्यगिरि ने किया। अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महंत हरि गिरि, जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय मंत्री श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती, श्रीमहंत पृथ्वी गिरि, उमाशंकर भारती, हरिहरानंद, हरदेव गिरि सहित कई अखाड़ों के संत-महात्मा शामिल थे। संतों का जुलूस झूंसी, अलोपीबाग, बैरहना, कीडगंज से होता हुआ जुलूस यमुना बैंक रोड स्थित मौज गिरि मंदिर जाकर समाप्त हुआ। अब यहीं से अखाड़ा का कुंभ क्षेत्र में प्रवेश होगा। 

अस्त्र-शस्त्र लाए साथ-

जूना अखाड़ा कुंभ को लेकर अपनी पूरी तैयारी के साथ आया है, इसमें पूजन के लिए चौकी व अन्य सामग्री, के अलावा अस्त्र, शस्त्र भी साथ लाए हैं, इसमें भाला, गहदाला, गदा के साथ कुछ संत पिस्टल भी लेकर आए हैं। 

घर ले गए मिट्टी-

अखाड़ा के संतों का जुलूस गुजरने के बाद सड़क के किनारे खड़े लोगों ने वहां की मिट्टी को माथे पर लगाया। जबकि कुछ उसे श्रद्धाभाव से अपने साथ घर ले गए।

कुंभ मेले पर सेना भी रखेगी नजर-

प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अंबरीश चंद्र शर्मा ने माना कि कुंभ में आतंकी खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि किसी भी आतंकी साजिश से निपटने के लिए यूपी पुलिस पूरी तरह से सक्षम है। श्री शर्मा मंडलीय समीक्षा बैठक के बाद पुलिस लाइन स्थित सभागार में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि कुंभ में आतंकी साजिश से निपटने के लिए एटीएस और एसटीएफ की टीमें लगा दी गई हैं। एंटी माइंस टीम की भी व्यवस्था की गई है। जल पुलिस के साथ कई पेट्रोलिंग टीमें भी कुंभ में तैनात कर दी गई हैं। केंद्र से स्पेशल फोर्स की भी मदद ली जा रही है। प्रमुख स्नान पर्वो पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल मौजूद रहेगा। भीड़ कितनी ही क्यों न हो, एक-एक व्यक्ति की चेकिंग होगी। एक सवाल के जवाब में बताया कि मेला क्षेत्र में ही 127 कैमरों की व्यवस्था की गई है, जिससे हर व्यक्ति पर नजर रखी जा सकेगी। किसी भी अफवाह के बाद की स्थिति से निपटने के लिए हम स्पेशल फोर्स की मदद लेंगे। साथ ही एसएमएस की व्यवस्था भी की गई है, जिससे हर व्यक्ति को संदेश के माध्यम से सही स्थिति से अवगत कराया जा सके। हम सेना से भी मदद ले रहे हैं। वहीं इससे पहले प्रमुख सचिव (गृह) आर.एम. श्रीवास्तव ने बताया कि कुंभ मेले में किसी तरह का व्यवधान नहीं होगा। इलाहाबाद मंडल की कानून व्यवस्था पर संतोष जताया। यदि कहीं भी सांप्रदायिक हिंसा हुई, तो उस क्षेत्र के अपर पुलिस अधीक्षक और क्षेत्राधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
पांच अखाड़ों की पेशवाई की तिथियां निर्धारित-अखाड़ों ने अपनी-अपनी पेशवाई की तिथियां निर्धारित कर दी हैं और इसकी जानकारी मेला प्रशासन को भी उपलब्ध करा दी है। अब उनकी पेशवाई को ठीक ढंग से संपन्न कराने में प्रशासन अपनी तैयारी में जुट गया है। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी की पेशवाई तीन जनवरी की सुबह 6 बजकर 45 मिनट पर होगी। वहीं श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा की पेशवाई 19 दिसंबर को होगी। श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े की पेशवाई 18 दिसंबर को होगी। श्री पंच अटल अखाड़ा की पेशवाई पांच जनवरी को होगी। श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा बड़ा उदासीन की पेशवाई 10 जनवरी को होगी। 

पीपे का पुल बढ़ाने की मांग-कुंभ मेला क्षेत्र के एक भाग में पीपे का पुल बढ़ाने की मांग शुरू हो गई है। इस बार प्रशासन कुंभ मेला संगम तट से सलोरी तक बसा रहा है। इसके लिए संगम से पुरानी जीटी रोड तक पीपे के दस पांटून पुल बनाए जा रहे हैं। जबकि जीटी रोड से सलोरी तक आवागमन के लिए चार पुल बनाए जाएंगे। प्रयाग धर्मसंघ के अध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल ने इसकी संख्या बढ़ाने की मांग की है। मंडलायुक्त देवेश चतुर्वेदी को ज्ञापन देकर कहा कि मेला की 80 प्रतिशत आबादी वाले क्षेत्र में सिर्फ चार पुल होने से भीड़ नियंत्रण करने में दिक्कत होगी, साथ ही श्रद्धालुओं को काफी भटकना पड़ेगा। प्रमुख स्नान पर्वो पर स्थिति और खराब हो जाएगी। 

ठेकेदार करेंगे टेंडर कार्य का बहिष्कार-कुंभ मेले के मद्देनजर नगर क्षेत्र में 456 कार्यो के लिए सात दिसंबर को डाले जाने वाले टेंडर का ठेकेदार बहिष्कार करेंगे। उनका कहना है कि उनके पुराने कार्यो का अब तक भुगतान नहीं मिला है। इसलिए जब तक वह भुगतान नहीं हो जाता तब तक नया टेंडर नहीं होने देंगे। सूत्रों के अनुसार नगर निगम प्रशासन एवं ठेकेदारों के बीच आगामी दिनों में वार्ता हो सकती है। जिससे यह मामला सुलझ जाएगा और टेंडर में कोई दिक्कत नहीं होगी।

शिविर अध्यक्षों की बैठक आज-कुंभ मेला को लेकर श्रीरामानुज नगर प्रबंध समति आचार्यबाड़ा की बैठक बुधवार को बाड़ा खटला आश्रम दारागंज में होगा। स्वामी रामेश्‌र्र्वराचार्य की अध्यक्षता में दोपहर दो बजे आयोजित इस बैठक में मेला प्रशासन द्वारा कुंभ को लेकर किए जा रहे कार्यो पर विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक में आचार्यबाड़ा अपनी आगे की रणनीति भी घोषित करेगा।