इलाहाबाद: इलाहाबाद में ‘महाकुंभ’ के पहले दिन आज नगा साधुओं, अन्य साधुओं
और संतों के अलावा लाखों की संख्या में लोगों ने गंगा, यमुना और सरस्वती
(अब लुप्त हो चुकी हैं) के संगम में स्नान किया.
मकर संक्राति के अवसर पर आज सूर्योदय होने के साथ ही भारी संख्या में
‘महानिर्वाणी अखाडा’ और ‘अटल अखाडा’ के साधुओं तथा नाग साधुओं का ‘शाही
स्नान’ आरंभ हो गया. ‘शाही स्नान’ का नजारा देखने लायक था. एक ओर बडी
संख्या में लंगोट पहने या फिर निर्वस्त्र भस्म लपेटे नगा साधु संगम की ओर
बढ रहे थे तो दूसरी ओर विभिन्न अखाडों और अन्य साधु समुदायों के
‘महामंडलेश्वरों’ धर्मगुरुओं की सजी संवरी पालकियां चल रही थीं. कुछ
सजे-धजे हाथियों पर सवार थे तो कुछ ने घोडों की सवारी की.
नगा साधुओं के शरीर पर जहां गेंदे के फूलों और रुद्राक्ष की मालाएं नजर आ
रही थीं वहीं दूसरी ओर अन्य साधुओं ने सोने के मुकुट और अन्य गहने पहने हुए
थे. हजारों की संख्या में आम लोग और विदेशी ‘शाही स्नान’ को देखने आए थे.
भारत की विविधता में एकता का यह संगम बहुत ही सुन्दर था. संगम पर पहुंचकर
सभी साधुओं ने अपने पारंपरिक अस्त्रों जैसे त्रिशूल, धनुष और तलवारों की
पूजा की और फिर स्नान से पहले अपने इष्ट की पूजा की. ‘महानिर्वाणी अखाडा’
और ‘अटल अखाडा’ के बाद 11 अन्य अखाडों का जुलूस निकला. सभी अखाडों को उनमें
शामिल लोगों की संख्या के आधार पर आधे घंटे से एक घंटे का समय दिया गया
था.
इन अखाडों की स्थापना आठवीं सदी में आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म की
रक्षा और प्रचार के लिए की थी. समय के साथ-साथ इन अखाडों की संख्या में
वृद्धि होने लगी और हर 12 वर्ष के बाद आयोजित होने वाले ‘महाकुंभ’ में इनकी
भूमिका निर्णायक होती है. ‘शाही स्नान’ के जुलूस में सबसे बेमेल बात रही
द्वारका पीठ और ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्यों का भाग ना लेना. इलाहाबाद में
‘महाकुंभ’ का आयोजन द्वारका पीठ के शंकराचार्य और ज्योर्तिपीठ बद्रीकाश्रम
स्वामी स्वरुपानंद के नियंत्रण क्षेत्र में हो रहा है.
मेला में मौजूद ज्योर्तिपीठ बद्रीकाश्रम के शंकराचार्य के करीबी सहयोगी
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया, ‘‘स्वामी स्वरुपानंद ने देश में उग आए
स्वयंभू संतों से शंकराचार्य को अलग करने के लिए आदि शंकराचार्य के
नियमानुसार चारों पीठों के लिए चतुष्पथ बनाने की मांग की थी. लेकिन प्रशासन
ने अनुरोध को नई परंपरा आरंभ करने तुल्य बताते हुए अस्वीकार कर दिया.’’
इलाहाबाद के डिवीजनल आयुक्त देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि आज संगम में 80
लाख से ज्यादा लोगों ने स्नान किया. अभी भी बडी संख्या में लोग संक्रांति
के स्नान के लिए आ रहे है और इसके देर रात तक चलने की संभावना है
अधिकारियों के अनुसार पूरे मेले में कहीं से भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं
है.
