मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

दुनिया का पहला एसएमएस था 'मेरी क्रिसमस'


क्रिसमस की तैयारियां जोर-शोर पर हैं। जाहिर है एक-दूसरे को बधाई के साथ यादगार तोहफे भी दिए जाएंगे। मगर, ये कम लोग ही जानते होंगे कि दुनिया को एसएमएस (शॉर्ट मैसेज सर्विस) का तोहफा भी 'क्रिसमस' की खुशियों के बीच ही मिला है। 

21 साल पहले एक इंजीनियर ने अपने दोस्त को एसएमएस से पहली दफा क्रिसमस की बधाई दी और इतने सालों में एसएमएस बन गया लगभग हर इंसान की एक जुबां। एसएमएस का जन्म 3 दिसंबर 1992 को हुआ था। लंदन निवासी 22 वर्षीय इंजीनियर नील पेप वॉथ ने अपने टाइप राइटर से अपने दोस्त रिचर्ड जारवर के मोबाइल फोन पर मैरी क्रिसमस का बधाई संदेश एसएमएस के जरिए भेजा था। उस समय उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि आने वाले समय में बधाई संदेश भेजने के लिए एसएमएस का ही सबसे ज्यादा प्रयोग होगा। 21 साल में एसएमएस दुनिया में छा गया है।

टेली कम्युनिकेशन कंपनियों का बढ़ा बिजनेस-इस सेवा को हर आदमी के हाथ में पहुंचाने का काम किया मोबाइल कंपनी नोकिया ने। नोकिया ने सबसे पहले जीएसएम हैंडसेट बनाकर इसे आसान कर दिया। इसके बाद एसएमएस की दुनिया में क्रांति आ गई। सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को एसएमएस के जरिए अच्छा बिजनेस मिला। 1998 में हुए एक सर्वे के अनुसार, एक महीने में चार मैसेज भेजे जाते थे। 

वहीं, 2010 में पूरे विश्व में 6.1 टिलियन मैसेज भेजे गए। यानी एक सेकंड में औसतन 1,93,000 मैसेज भेजे गए। 

प्यार की भाषा बना एसएमएस-एक समय था जब कबूतर के जरिए प्यार का इजहार करने के लिए खत भेजे जाते थे। समय बदला तो कबूतर की जगह डाक सेवा आ गई। इसके बाद आइटी युग की शुरुआत हुई। मोबाइल फोन आए तो प्यार का इजहार आसान हो गया। धीरे-धीरे एसएमएस का प्रचलन बढ़ा तो दिलों की दूरियां कम हुईं। एसएमएस प्यार की भाषा बन गया। कॉलेज में पढ़ने वाले, नौकरी पेशा युवा में एसएमएस का सबसे ज्यादा चलन है।

जगमग हुए चर्च, आज जन्मेंगे यीशु

प्रेम, करुणा और शांति का संदेश देने वाले प्रभु यीशु का जन्म मंगलवार आधी रात को होगा। जिसके लिए गिरजाघरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। चर्च परिसर रंगीन रोशनी से झिलमिला रहे हैं, झांकियां सज चुकी हैं। 

क्रिश्चियन समाज के लिए मंगलवार की रात खुशियां लेकर आएगी। आधी रात को बालक यीशू का जन्म होगा। घंटे घड़ियाल बजेंगे, मोमबत्तियां झिलमिलाएंगी, विशेष प्रार्थना सभा होंगी, बधाई गीत गाए जाएंगे। निष्कलंक माता के महागिरजाघर के फादर जो थाइकटिल ने बताया कि दिसंबर से क्रिश्चियन समाज द्वारा आगमन काल मनाया जा रहा था। जिसके तहत सभी सभी ने परहेज रखा, नियमित माला विनती की। इसके बाद कैरल सिंगिग हुआ। घर-घर जाकर युवाओं ने क्त्रिसमस गीत गाए। मुख्य आयोजन सेंट पीटर्स परिसर में क्रिसमस का प्रमुख आयोजन वजीरपुरा रोड स्थित निष्कलंक माता के महागिरजाघर, अकबरी चर्च और सेंट पीटर्स स्कूल में होगा। दोनों चचरें पर आकर्षक लाइटिंग की गई है। फादर जोन डिकूना ने बताया कि मंगलवार को यहां रात 11 बजे क्रिसमस गीत शुरू हो जाएंगे। 11.30 बजे विशेष पूजन शुरू होगा। भक्ति गीतों के मध्य बाइबिल का पाठ होगा। 

महाधर्माध्यक्ष डॉ.अल्बर्ट डिसूजा क्रिसमस का संदेश देंगे। मध्य रात्रि 12 बजे यीशु का जन्म होगा। सभी एक दूसरे को बधाइयां देंगे। निष्कलंक माता के महागिरजाघर के बाहर गौशाला की आकर्षक झांकी सजाई गई है, अकबरी चर्च के बाहर भी झांकी सजी हुई है। वहीं सेंट पीटर्स कॉलेज में आधा दर्जन से अधिक झांकियां सजाई गई हैं। जिनमें प्रभु का मानव रूप में आगमन, पापाचार के कारण सृष्टि का विनाश आदि प्रमुख हैं। 25 दिसंबर को ये दोनों गिरजाघर नागरिकों का लिए पूरे दिन खुले रहेंगे। इसके लिए सेंट पीटर्स कॉलेज के दोनों गेट खुले रहेंगे। एक से प्रवेश और दूसरे से निकास होगा। चर्च के बाहर खेल, तमाशे वाले रहेंगे। जिससे पूरे दिन मेला जैसा माहौल रहेगा।
रात्रि 9.30 बजे शुरू हो जायेगा कार्यक्रम-

अमन के राजकुमार प्रभु यीशु मसीह के जन्म में अब अधिक देर नहीं। जनपद का पूरा क्रिश्चियन समाज इस सेलिब्रेशन के लिये तैयार है। चर्च ही नहीं इस समाज से जुड़े अधिकतर लोगों के घर-प्रतिष्ठान भी सतरंगी रोशनी से रोशन होने लगे हैं। मकानों की छतों पर स्टार और आंगन में चरनी तथा क्रिसमस ट्री भी रोशनी से सजाये गये हैं।
प्रेम, करुणा और सदभावना का संदेश देने वाले प्रभु यीशु मंगलवार-बुधवार की मध्य रात्रि अवतरित होंगे। छतों पर तारे चमक रहे हैं और रसोईघर केक व पकवानों की सुगंध से महक रहे हैं।
कैरोल गीतों में क्रिसमस का उल्लास दिखाई दे रहा है। 'आया है यीशु आया है, मुक्ति ले साथ आया है ' जैसे अनेक गीत हैं जिसे ईसाई समाज 24 दिसंबर की मध्य रात्रि तक गाकर यह संदेश देगा कि प्रभु यीशु धरा पर अवतरित होने वाले हैं। घरों के आंगन में चरनी सजायी जा रही है। मतलब यह कि प्रभु यीशु के जन्म को मूर्तियों के जरिये दर्शाया जा रहा है।

कैरोल सांग भजन समान होते हैं। क्रिसमस के अवसर पर ईसाई समाज इसका गायन करता है। गायन के जरिये प्रभु यीशु की महिमा, उनके जन्म की परिस्थितियां, यीशु के संदेश और मां मरियम द्वारा सहे गये कष्टों के बारे में जानकारी दी जाती है। कैरोल गाने के बाद चॉकलेट और मीठे बिस्किट का सेवन करने की प्रथा है। प्रभु यीशु के जन्म लेने से पहले फरिश्तों ने उनकी माता मरियम और पिता युसूफ को यह संकेत दिया था कि यीशु का जन्म होने वाला है। कैरोल सिंगिंग की परंपरा तभी से है।

दिसंबर की रात्रि करीब साढ़े नौ बजे क्रिश्चियन समाज के लोग चर्चो पर एकत्रित होकर मसीह संगीत का गायन शुरू करेंगे। यह दौर मध्य रात्रि तक जारी रहेगा। रात्रि बारह बजते ही चर्चो में प्रभु यीशु का जन्म हो जायेगा। इसकी खुशी में घंटे-घड़ियाल बजेंगे। चर्चो में प्रार्थना सभाएं होंगी। इस मौके पर पादरी देश, समाज और राजनीति की शुद्धता आदि के लिये प्रार्थना सभाएं करेंगे। प्रभु यीशु के अवतार लेने की वजह आदि की जानकारी दी जायेगी। इसके बाद सभी लोग अपने-अपने घर चले जायेंगे। 25 दिसंबर को प्रात: नये कपड़ों में सज-धजकर लोग करीब नौ बजे चर्चो में जायेंगे। यहां प्रार्थना आदि कार्यक्रम होंगे।

Source : Dainik Jagran